Homeउत्तर प्रदेशMeerutMeerut News: काली नदी किनारे बसे गांवों में 'जहर बना पानी'

Meerut News: काली नदी किनारे बसे गांवों में ‘जहर बना पानी’

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– हैंडपंपों से निकल रहा कैंसर वाला पानी, सीसीएसयू की रिपोर्ट ने उड़ाए होश।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों गांवों पर इस वक्त मौत का साया मंडरा रहा है और इसकी वजह है वह पानी, जिसे हम ‘जीवन’ कहते हैं। मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के एक ताजा और चौंकाने वाले शोध ने यह साबित कर दिया है कि काली नदी के किनारे बसे इलाकों में भूजल अब पीने लायक नहीं बचा है। फैक्ट्रियों के जहरीले रसायनों ने हैंडपंपों के पानी को धीमा जहर बना दिया है, जिससे इन इलाकों में कैंसर और त्वचा रोगों जैसी घातक बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं।

 

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मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट आॅफ टॉक्सिकोलॉजी ने हाल ही में पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों से हैंडपंप के पानी के सैंपल इकट्ठा किए थे। विभाग के एचओडी डॉक्टर यशवेंद्र की देखरेख में हुए इस शोध में यह पाया गया कि जहां-जहां से काली नदी गुजरती है, वहां का वाटर लेवल और क्वालिटी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। जांच में पानी का पीएच लेवल मानकों के विपरीत पाया गया, जो सीधे तौर पर इंसानी शरीर के लिए असुरक्षित है।

पानी में मिले लेड और आर्सेनिक जैसे घातक केमिकल्स: रिसर्च में सबसे डराने वाली बात यह सामने आई है कि हैंडपंप के पानी में लेड (सीसा) और आर्सेनिक जैसे भारी तत्व मौजूद हैं। ये केमिकल्स न केवल किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि शरीर के डीएनए तक को प्रभावित कर सकते हैं। काली नदी के पास रहने वाले लोग अनजाने में हर रोज इन रसायनों का सेवन कर रहे हैं, जिससे स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

कैंसर का गढ़ बनते जा रहे हैं नदी किनारे के गांव: शोध केवल पानी की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टीम ने स्थानीय अस्पतालों के डेटा का भी बारीकी से अध्ययन किया। अस्पतालों से मिले आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज उन्हीं गांवों से आ रहे हैं जो काली नदी के बहाव क्षेत्र के करीब हैं। लेड और आर्सेनिक युक्त पानी के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में गंभीर स्किन इन्फेक्शन और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं।

इंडस्ट्रीज का कचरा और प्रशासन की नाकामी

सहारनपुर, मेरठ और गाजियाबाद जैसे जिलों से गुजरने वाली काली नदी आज अपने नाम की तरह पूरी तरह काली और जहरीली हो चुकी है। आसपास की फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रीज का प्रदूषित केमिकल बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदी में बहाया जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इस पर कई बार सख्त निर्देश और फटकार लगाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला। आज हालात ये हैं कि सैकड़ों गांवों के पास शुद्ध पेयजल का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है।

 

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