सब्जी के दामों ने भारी उछाल, बड़ी मंडी से निकलते ही दाम हो जाते हैं दोगुने
मेरठ। जनपद मेरठ में मौसम में बदलाव, बारिश और फसलों को नुकसान पहुंचने के कारण स्थानीय मंडियों में सब्जियों के दामों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। थोक और खुदरा बाजारों में टमाटर, प्याज, आलू और हरी सब्जियों के दाम बढ़ने से आम जनमानस का बजट प्रभावित हुआ है। मानसून के आते ही सब्जी के दामों में भारी उछाल आ गया है। जिससे मध्यमवर्गीय लोगो की जेब पर असर पडने लगा। बाजार के जानकारों का कहना है कि, अब कावड यात्रा खत्म होने के बावजूद सब्जियों के दाम आसमान छू रहे है। जबकि, मानसून के आगमन के चलते सब्जियों के दामों में और उछाल आयेगा। इससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
दामों में बढ़ोतरी के कारण बारिश के कारण सब्जियों की आवक कम हो गई है, जिससे दाम बढ़ गए हैं। हालांकि, कावड़ यात्रा के चलते ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। लेकिन, कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद भी सब्जियों के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे है। जिसके चलते आम आदमी की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल बीते दिनों कांवड़ यात्रा के चलते मार्गों पर भारी वाहनों का संचालन बंद था। जिसका असर मेरठ की नवीन और लोहिया नगर सब्जी मंडी पर साफ दिखाई दे रहा था। लेकिन, कावड़ यात्रा खत्म होने के बावजूद भी सब्जियों के दाम अभी तक काम नहीं हुए हैं। मंडी में बाहर से आने वाली सब्जियों की कम आवक होने से सब्जियों के भाव में उछाल आया है। हालांकि, स्थानीय सब्जियां भी सस्ती नहीं बिक रही हैं।
मंडी में खरीददारों का भी टोटा है। अधिकतर फुटकर सब्जी विक्रेता बारिश होने के कारण मंडी से सब्जी खरीदने नहीं आ रहे हैं। थोक मंडी (एपीएमसी में आलू के दाम लगभग ₹935 प्रति क्विंटल तक हैं, जबकि खुदरा बाजार में आलू ₹20 से ₹40 प्रति किलो और प्याज ₹60 से ₹80 प्रति किलो तक बिक रहा है।हरी सब्जियों में गोभी, भिंडी, लौकी और बैंगन जैसे अन्य सब्जियों के दाम भी गुणवत्ता और मांग के आधार पर ₹40 से ₹60 प्रति किलो या उससे अधिक तक पहुंच गए हैं। जिसका मुख्य कारण बेमौसम बारिश, परिवहन लागत और मंडियों में आवक कम होना कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण माना जा रहा है।