- विवाद एक जैसा, कार्रवाई का स्तर हो रहा अलग-अलग
- आवास एवं विकास परिषद के भ्रष्टाचार की खुल रही परत दर परत पोल, संपत्ति विभाग कटघरे में।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। आवास एवं विकास परिषद में भ्रष्टाचार और मनमाने रवैये की पोल परत दर परत खुल रही हैं। दो प्लॉटों को लेकर विवाद है, जिनके मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। लेकिन एक मामले में जहां संपत्ति विभाग ने प्लॉट को नीलामी से बाहर रखा है, तो दूसरे प्लॉट को नीलामी में शामिल कर दिया है। ऐसे में अब आवास एवं विकास के अधिकारी कहीं न कहीं विधिक कार्रवाई में फंसते हुए नजर आ रहे हैं।
सिस्टम से हताश आवंटी ने मांगी इच्छामृत्यु –
– आवास एवं विकास परिषद के भ्रष्टाचार की खुल रही परत दर परत पोल, संपत्ति विभाग कटघरे में।
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पहला मामला प्लॉट संख्या 3/97 का है। इस प्लॉट की नीलामी गत वर्ष की गई थी। जो पिंटू पुत्र ओमपाल के नाम छूटी थी। पिंटू ने इस प्लॉट की पूरी कीमत करीब पचास लाख रुपये आवास एवं विकास परिषद में जमा करने के साथ ही करीब पांच लाख रुपये के स्टांप पेपर भी रजिस्ट्री के लिए खरीदकर संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा के पास जमा कर दिए। लेकिन बाद में उक्त प्लॉट को आरक्षित प्लॉट बताकर नीलामी निरस्त कर दी गई। जिसका मामला इस समय हाईकोर्ट में चल रहा है। लेकिन सुनवाई के दौरान ही संपत्ति अधिकारी ने उक्त प्लॉट को 22 अगस्त को फिर से नीलामी में शामिल कर नीलाम कर दिया। जो कोर्ट की अवमानना में आता है।

ऐसा ही दूसरा मामला प्लॉट संख्या 3/216 का है। इस प्लॉट की भी नीलामी हुई, लेकिन बाद में विवाद होने पर नीलामी में प्लॉट लेने वाले हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। बावजूद इसके इस प्लॉट को भी फिर से नीलाम कर दिया गया और नीलामी भी सुरक्षित मूल्य से लगभग 37 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर छूटी। लेकिन बाद में वाद दायर होने की सूचना के चलते इस प्लॉट की नीलामी रद्द कर दी गई।
ऐसे में अब पिंटू पुत्र ओमपाल का आरोप है कि जब प्लॉट संख्या 3/216 की नीलामी निरस्त की जा सकती है, तो उसके प्लॉट संख्या 3/97 का आधार भी बिल्कुल वही है। पिंटू का कहना है कि सुनील शर्मा प्लॉट संख्या 3/216 पर स्थगन की बात कर रहे हैं, लेकिन इस प्लॉट की रिट पर भी कोई स्थगन नहीं है, बल्कि सुनवाई ही चल रही है। बावजूद इसके सुनील शर्मा उनके प्लॉट को नीलाम कर रहे हैं।
पिंटू पुत्र ओमपाल का कहना है कि सुनील कुमार शर्मा अपनी मर्जी से काम कर रहे है और इस सम्बन्ध में मेरे द्वारा उप आवास आयुक्त मेरठ जोन अनिल कुमार सिंह को भी शिकायती पत्र दिया जा चुका है। लेकिन उनके द्वारा भी मेरे शिकायती पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है और मुझे न्याय नहीं दिलाया जा रहा ही। यदि सुनील कुमार शर्मा द्वारा एकरूपता के साथ कार्य नहीं किया जाता है तो सुनील कुमार शर्मा मुझे जहर ला कर दे दें और मैं मुख्यमंत्री से इच्छामृत्यु की मांग करूंगा।
आखिर किसके दबाव में है आवास-विकास
अब प्लॉट संख्या 3/97 को लेकर बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी आखिर किस दबाव में है। क्योंकि यह प्लॉट 156वर्ग मीटर का कॉर्नर का प्लॉट है। हालांकि पिंटू ने भी काफी बढ़ी दर पर इसकी नीलामी ली है। लेकिन अब इस प्लॉट को रिजर्व में दर्शाकर इसे कम कीमत पर किसी सत्ता पक्ष के नेता को देने की तैयारी आवास-एवं विकास परिषद कर रहा है। क्योंकि इसकी आरक्षित श्रेणी अनुसूचित जाति, एमपी और एमएल रखी गई है।
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