– रिटायर्ड कर्नल ने द सैनिक सहकारी आवास समिति में गबन का किया था पदार्फाश।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। डिफेंस कालोनी में रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र पाल सिंह पर हुए जानलेवा हमले के तार द सैनिक सहकारी आवास समिति लिमिटेड में हुए 5.57 करोड़ रुपये के आर्थिक घोटाले से जुड़ रहे हैं। उस घोटाले में शामिल प्रमुख चार लोगों के नाम एफआईआर में भी खोले गए हैं। जिनकी भूमिका की जांच गंगानगर थाना पुलिस ने शुरू कर दी है।

रिटायर्ड कर्नल पर जानलेवा हमले की भनक लगते ही ना केवल पुलिस बल्कि सेना पुलिस भी एक्टिव हो गई। उन्होंने रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र पाल सिंह से पूरा घटनाक्रम जाना और हमलावरों की तलाश शुरू कर दी। कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व उनके द्वारा समिति में लाखों रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई थी, जिसमें रिकवरी के आदेश हुए हैं। उसी की खुन्नस में यह हमला किया गया है।

यह था आवासीय समिति का घोटाला
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि समिति अगर कोई बिक्री करती है तो उस बिक्री के प्रोफिट का 10 प्रतिशत सोसाइटी फंड में जमा होता है। वर्ष 2019 में उनके एक रिश्तेदार ने डिफेंस कालोनी में 200 गज का मकान क्रय किया और 10 प्रतिशत के हिसाब से 7.85 लाख रुपये जमा करा दिए। इसी दौरान पता चला कि उनके बाद 400 गज का 2.25 लाख रुपया और 800 गज का लगभग 8 लाख रुपये जमा कराया गया है।
एडीजी से मामले की शिकायत
रिटायर्ड कर्नल ने बताया कि इस घोटाले की पुष्टि करने के बाद उन्होंने तत्कालीन एडीजी जोन राजीव सभरवाल से शिकायत की। उन्होंने जांच कराई, जिसमें आरोप साबित हो गए। इसके बाद पुलिस ने जांच रिपोर्ट रजिस्ट्रार को सौंप दी। रजिस्ट्रार ने एसीएम से जांच कराई, जिसमें 6 प्रोपर्टी की बिक्री में 39 लाख रुपये की गड़बड़ी निकलकर सामने आ गई।
जांच दर जांच बढ़ती गई गड़बड़ी
39 लाख की गड़बड़ी से जुड़ी रिपोर्ट लखनऊ भेजी गई। आरोपियों ने खुद पर लगे आरोप खारिज कर दिए तो वहां से तीन सदस्यी कमेटी गठित कर दी गई, जिसमें एसीएम के अलावा एक एडीएम और एक आवास अधिकारी शामिल रहे। जैसे ही जांच शुरू हुई, उन्होंने ऐसी 16 प्रोपर्टी से जुड़ा रिकार्ड तीन सदस्यी कमेटी को सौंप दिया, जिसमें 2.17 करोड़ रुपये की गड़बड़ी दिखाई गई थी।
रिकवरी के कर दिए आदेश
गड़बड़ी बढ़ने के बाद मामला फिर लखनऊ में बैठे रजिस्ट्रार तक पहुंच गया। रजिस्ट्रार ने अंडर सेक्शन 64 यूपी कॉपरेटिव एक्ट के अनुसार कमेटी को क्रास एग्जामिन कराया। इस बार जांच में घपला 2.17 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 5.57 करोड़ का अनुमान दशार्या गया, जिसकी रिपोर्ट मिलते ही रजिस्ट्रार ने संबंधित लोगों से रिकवरी के आदेश जारी कर दिए।
नौ लोगों पर लगाई गई पाबंदी
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि यह घपला वर्ष 2019 से वर्ष 2021 के बीच हुआ। तब महेंद्र सिंह, रण सिंह तोमर, सलमान खान और अभिनव त्यागी समेत 9 लोग समिति का हिस्सा थे। रजिस्ट्रार ने आदेश जारी कर दिया कि यह 9 लोग आगामी छह वर्ष तक किसी समिति का हिस्सा नहीं बनेंगे। अगर कोई है तो उसको भी हटा दिया जाएगा।
गवाही पर टिकी है कार्रवाई
रिटायर्ड कर्नल सुरेंद्र पाल सिंह कहा कि इस मामले में अंतिम गवाही मई में होनी है। उनकी गवाही के बाद कार्रवाई तय हो जाएगी। वह गवाही ना दे पाएं, इसलिए उन पर हमला किया गया है। बदमाशों ने जान से मारने का पूरा प्रयास किया लेकिन वह वाकिंग स्टिक से खुद को बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं।
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