हरिश्चंद्र घाट पर सीढ़ियों पर जल रहीं चिताएं
वाराणसी। गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। पानी लगातार ऊपर चढ़ने से काशी के 84 घाटों का संपर्क टूट गया है। घाटों के आसपास बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर भी पानी में डूब गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी अंतिम संस्कार के लिए हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पहुंच रहे परिवारों को हो रही है।
हरिश्चंद्र घाट पर जिस प्लेटफॉर्म पर सामान्य दिनों में अंतिम संस्कार होता था, वह अब गंगा के पानी में डूब चुका है। ऐसे में मजबूरी में सीढ़ियों पर ही शवदाह किया जा रहा है। वहीं, मणिकर्णिका घाट पर ऊंचे प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जा रहा है।
हरिश्चंद्र घाट पर डोम राजा परिवार के सदस्य ओंकार चौधरी ने बताया कि वाराणसी में अभी तेज बारिश नहीं हुई है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश का असर गंगा के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने बताया कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो अंतिम संस्कार के लिए घाट से लगी गलियों की ओर जाना पड़ सकता है।
शवदाह का काम करने वाले नीलेंद्र चौधरी ने बताया कि सामान्य दिनों में जिस प्लेटफॉर्म पर अंतिम संस्कार होता था, वह पूरी तरह पानी में डूब गया है। अब सीढ़ियों पर शवदाह करने की मजबूरी है।
उन्होंने बताया कि पहले एक साथ 8 से 9 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था हो जाती थी, लेकिन पानी बढ़ने के बाद एक साथ 4 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। इसके चलते कई परिवारों को 3 से 4 घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
मणिकर्णिका घाट पर भी बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। यहां ऊंचे प्लेटफॉर्म पर अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। जगह सीमित होने के कारण शवों की संख्या कम हो गई है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिवारों को इंतजार करना पड़ रहा है।