– नारी वंदन अधिनियम के निंदा प्रस्ताव को लेकर नगर निगम बोर्ड की बुलाई थी बैठक।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर निंदा प्रस्ताव के लिए बुलाई गई नगर निगम बोर्ड बैठक का विपक्षी पार्षदों ने बहिष्कार किया। इसके लिए प्रेस वार्ता का आयोजन करते हुए कांग्रेस सहित विपक्षी पार्षदों ने इसे भाजपा का राजनीतिक और अपने स्वार्थ की पूर्ति का एजेंडा बताया।

मंगलवार को केसर गंज स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता करते हुए पूर्व डिप्टी मेयर और कांग्रेस नेता रंजन शर्मा ने बताया कि, 20- 21 सितम्बर 2023 को लोकसभा और राज्य सभा में उपरोक्त महिला आरक्षण बिल सर्व सहमति से पास हो गया था। जिसमें 456 सांसदों ने लोकसभा तथा 214 सांसदों ने राज्यसभा में सर्वसम्मति से उक्त बिल को महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए पास कर दिया था। जिसका नोटिफिकेशन भी हो गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी हो गये थे। तो उसके अनुरूप महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया गया और किसने रोका था।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को जो 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना था। उसे विपक्ष ने ही 30 महीनों तक सरकार में क्यों रोका, 30 महीनों तक सरकार क्यों चुप बैठी रही। बंगाल और तमिलनाडू के चुनाव को ध्यान में रखकर केवल एक ही दिन में बिल को नोटिफाईड कराकर अगले ही दिन सदन में सांसदों को गुमराह करने के लिये रख दिया गया। ये केवल चुनाव में अपनी राजनैतिक रोटी सेकने के उद्देश्य से किया गया। ताकि इस बिल को आधार बनाकर विपक्ष पर वार किया जा सके।
इसी को देखते हुए नगर निगम के सभी पार्षद यह मांग है कि, अब जो जनगणना होगी, उसमें जातिगत जनगणना भी होनी चाहिए। उसमे जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के अनुसार एससी-एसटी और ओबीसी को जितना आरक्षण मिले उसमें 33 प्रतिशत महिलाओं का रखा जाये।
उन्होंने आरोप लगाया कि महानगर में जनता सहकर, जसकर, टूटी सड़कों, सफाई व्यवस्था व पूरे महानगर में धूल से परेशान है। नाम परिवर्तन के नाम पर सदन व कार्यकारिणी से पास होने तथा शासनादेश के बाद भी जनता से भारी भरकम रकम वसूली जा रही है, इन मुद्दों को लेकर सदन बुलाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि, यह महिला उत्थान की बात करते हैं, जबकि निगम में ही विपक्ष की महिलाओं और पार्षदों को बोलने तक नहीं दिया जाता। उनके द्वारा सदन में रखे गये प्रस्तावों तक को कायवृत्त तक में नहीं जोड़ा जाता। इसलिए हम सभी संयुक्त पार्षद दल के पार्षदों की मांग है कि, इन सभी गंभीर और ज्वलंतशील मुद्दों पर चर्चा हेतु तत्काल सदन बुलाया जाये। निगम में निन्दा प्रस्ताव जैसे मुद्दे तत्थहीन है। यह लोग देश के संघीय ढांचे को असंतुलित करने की कोशिश है, परिसीमन लागू करके पूरे देश की निर्वाचन क्षेत्र से छेड़खानी करने की साजिश है, एसआईआर वन नेशन वन इलेक्शन जैसी पॉलिसी के जरिये देश के चुनावी ढांचे बदलने की कोशिश की जा रही है।


