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मेरठ: दो सौ साल पुरानी जगन्नाथ रथ यात्रा पर फिर विवाद

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मेरठ: दो सौ साल पुरानी जगन्नाथ रथ यात्रा पर फिर विवाद
  • भगवान जगन्नाथ रथयात्रा समिति के दो पक्ष आए आमने-सामने, पहुंची पुलिस।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। सदर थानाक्षेत्र के बिल्वेश्वर नाथ मंदिर से निकलने वाली 27 जून की जगन्नाथ यात्रा पर विवाद खड़ा हो गया हैं। यह विवाद मंदिर समितियों के आपसी मतभेद के कारण है, जिसके कारण प्रशासन ने रथ यात्रा को अनुमति नहीं दी है। मेरठ में 200 साल से निकाली जा रही जगन्नाथ स्वामी की यात्रा की अनुमति दो कमेटी के विवादों के कारण प्रशासन ने नहीं दी है। प्रशासन ने मंदिर परिसर में डोले से प्रसाद वितरण का आदेश दिया है। जगन्नाथ स्वामी की यात्रा पर रोक लगाने से व्यापारी वर्ग ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शोभा यात्रा हर हाल में निकलेगी।

मेरठ में बिल्वेश्वर नाथ मंदिर से निकलने वाली 200 साल पुरानी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को मंदिर की दो समितियों के बीच आपसी विवाद के कारण प्रशासन ने रोक दिया है।

प्रशासन ने रथ यात्रा को अनुमति नहीं दी है। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय मंदिर समितियों के बीच चल रहे विवाद के कारण लिया गया है। गुरूवार को भी मंदिर समिति के दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और दोनों ही पक्षों में यात्रा निकालने को लेकर तीखी नोंकझोंक हुई। इस दौरान दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर घोटाला करने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई करने की धमकी दी।

वहीं, इस मामले की सूचना मिलते ही सीओ सदर और पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया। हालांकि, इस दौरान दोनों ही पक्षों के लोग एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए नजर आए। बता दें कि, जगन्नाथ रथ यात्रा एक वार्षिक उत्सव है, जो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सम्मान में मनाया जाता है। यह उत्सव 27 जून को पुरी के अलावा मेरठ में भी धूमधाम से मनाया जाता है।

इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथों में बैठाकर नगर भ्रमण कराया जाता है। यह यात्रा भक्तों के लिए मोक्ष का मार्ग मानी जाती है। पुरी की रथ यात्रा के अलावा मेरठ की यह रथयात्रा भारत की सबसे प्रसिद्ध रथ यात्राओं में से एक है।

लेकिन पिछले काफी समय से मंदिर समिति के दो गुटों में चली आ रहे मतभेदों के चलते मंदिर परिसर लगातार जंग का अखाड़ा बना हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि इस मामले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि, इस मामले में दोनों पक्ष अपनी अपनी बात रख रहे हैं। दोनों पक्षों की सहमति के बाद ही रथयात्रा निकालने की परमिशन दी जाएगी।

 

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