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बच्चे ने निगल लिया 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू, डॉक्टरों ने बचाई जान

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– दर्द से चिल्लाता रहा, गोरखपुर के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी से बचाई मासूम की जान।

गोरखपुर। एक हॉस्पिटल में 14 महीने के बच्चे के पेट से डॉक्टरों ने 2.5 इंच की नुकीली स्क्रू एंडोस्कोपी से सफलतापूर्वक निकाली। सिद्धार्थनगर जिले के बच्चे ने खेलते समय स्क्रू निगल लिया था। इस बारे में घरवालों को जरा भी भनक नहीं लगी।

 

गोरखपुर

 

जब बच्चे के पेट में लगातार दर्द शुरू हुआ तो, उसे आस-पास के मेडिकल स्टोर से दवा लाकर परिजनों ने दी। इसके बाद भी जब बच्चे का रोना नहीं बंद हुआ तो उसे डॉक्टर को दिखाया गया। डॉक्टरों की सलाह पर परिजन बच्चे को गोरखपुर के सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लेकर आए। जहां पर एक्स-रे कराने पर पेट में स्क्रू के फंसे होने का पता चला। तीन दिन तक तड़पते बच्चे को डॉक्टरों ने स्क्रू निकालकर दर्द से मुक्ति दिलाई।

सिद्धार्थनगर के पशुपतिनाथ दुबे ने बताया कि चार दिन पहले मेरे 14 माह के बेटे गर्वित दुबे के पेट में दर्द शुरू हुआ। तब कस्बे के ही एक मेडिकल स्टोर से दवा लाकर दी। कुछ देर के लिए बच्चा शांत हुआ। थोड़ी ही देर बाद वह और चीखने लगा।

शाम के समय सिद्धार्थनगर के एक डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने देखने के बाद गोरखपुर रेफर कर दिया। डॉक्टर से राय लेने के बाद बच्चे को गोरखपुर के चरगांवा स्थित सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में देर रात भर्ती कराया गया।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया कि सिद्धार्थनगर क्षेत्र से एक 14 महीने के बच्चे को गंभीर स्थिति में सिटी सुपर स्पैशलिटी हॉस्पिटल में रेफर किया गया। जिसने लगभग 2.5 इंच लंबी नुकीली स्क्रू (लकड़ी में प्रयोग होने वाली कारपेंटर स्क्रू) निगल ली थी। यह स्क्रू अत्यंत खतरनाक थी क्योंकि इसके नुकीले किनारे आंत में छेद, आंतों में संक्रमण या आंत फटने जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकते थे।

बच्चा लगभग 100 किलोमीटर दूर से देर रात करीब 2 बजे अस्पताल पहुंचा। सूचना मिलते ही अस्पताल की मेडिकल टीम पहले से तैयार थी। बच्चे का तत्काल परीक्षण कर एक्स-रे कराया गया। जिसमें पता चला कि स्क्रू पेट से आगे आंतों की ओर बढ़ चुकी है।

सबसे पहले पेडियाट्रिक एंडोस्कोपी के माध्यम से स्क्रू को निकालने का प्रयास किया गया। इस प्रक्रिया में पूरी मेडिकल टीम ने मिलकर रात करीब 2:15 बजे आपातकालीन एंडोस्कोपी की।

जांच के दौरान इसोफेगस, पेट और छोटी आंत के शुरुआती हिस्से तक निरीक्षण किया गया, लेकिन स्क्रू वहां नहीं दिखाई दी। फ्लोरोस्कोपी (लाइव एक्स-रे) से पुष्टि हुई कि स्क्रू आंत में आगे बढ़ चुकी है। बच्चे की स्थिति स्थिर होने और किसी प्रकार के पेरिटोनाइटिस या छेद के लक्षण न होने के कारण टीम ने बच्चे को निगरानी में रखने का निर्णय लिया।

बच्चे को पीडियाट्रिक यूनिट में भर्ती कर हर चार घंटे में सीरियल एक्स-रे द्वारा निगरानी की गई। कुछ समय बाद स्क्रू टर्मिनल इलियम के पास जाकर रुक गई और आगे बढ़ना बंद हो गया। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बड़े ऑपरेशन से बचाने के लिए कोलोनोस्कोपी करने का निर्णय लिया।

कोलोनोस्कोपी के दौरान पूरे कोलन की जांच की गई और टर्मिनल इलियम में प्रवेश कर स्क्रू मल में फंसी हुई दिखाई दी। इसके बाद एंडोस्कोपिक उपकरणों की सहायता से सावधानीपूर्वक उस स्क्रू को बाहर निकाल लिया गया। इस जटिल प्रक्रिया में सहायक टीम के सदस्य एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास नारायण सिंह, ओटी असिस्टेंट प्रिंस गुप्ता, हृदय दुबे, किशन सहित अन्य स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस प्रकार बिना बड़े ऑपरेशन के केवल मिनिमली इनवेसिव एंडोस्कोपिक तकनीक से स्क्रू को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया और बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है।

डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया कि बच्चों में फॉरेन बॉडी निगलने के कई जटिल मामलों को एंडोस्कोपी के माध्यम से सफलतापूर्वक संभाला गया है। इस तरह की नुकीली स्क्रू बेहद जोखिम भरी होती है क्योंकि यह आंतों को किसी भी स्थान पर छेद कर सकती है, जिससे जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

डॉक्टरों की सलाह: यदि किसी बच्चे के द्वारा गलती से सिक्का, बैटरी, स्क्रू या कोई अन्य वस्तु निगल ली जाए तो तुरंत अस्पताल में जांच करानी चाहिए। घरेलू उपाय जैसे तेल पिलाना, केला खिलाना आदि खतरनाक हो सकते हैं और जटिलता बढ़ा सकते हैं।

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