Homeउत्तर प्रदेशMeerutMeerut: चार बोतल खून के लिए मेरे पति को मार डाला, मृतक...

Meerut: चार बोतल खून के लिए मेरे पति को मार डाला, मृतक की पत्नी ने लगाए आरोप

-

– हॉस्पिटल ने बिल बनाने को ड्रामा रचा, सुसाइड नहीं मर्डर है।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। मेरे पति सुसाइड नहीं नहीं कर सकते हैं। उनका मर्डर हुआ है। मेरे पति को खून की कमी थी तो हॉस्पिटल ने उन्हें कउव में क्यों भर्ती किया। हॉस्पिटल वालों ने बड़ा बिल बनाने के लिए पूरा ड्रामा रचा है। उन्हें हॉस्पिटल की खिड़की से नीचे फेंका गया है।

 

 

लोकप्रिय हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल से गिरकर मरने वाले संजय की पत्नी ने ये बात कही। उन्होंने सवाल किया कि जब पति संजय आईसीयू में थे तो उनका स्टाफ ने ख्याल क्यों नहीं रखा। पूरी जिम्मेदारी नाइट शिफ्ट के स्टाफ की है। वे खुद टॉयलेट कैसे चले गए। अगर स्टाफ ले गया तो संजय ने अंदर से दरवाजा कैसे लगा लिया?

 

 

संजय की पत्नी ने सवाल उठाते हुए कहा कि संजय जब आईसीयू में थे तो बाथरूम का अंदर से दरवाजा क्यों लगने दिया? इस कमजोरी की स्थिति में बिना किसी सहारे के संजय खिड़की तक कैसे चढ़े? हादसे के बाद नाइट शिफ्ट में काम करने वाले स्टाफ को क्यों हटा दिया गया? इन सवालों के जवाब वह अब पुलिस और अस्पताल प्रबंधन दोनों से मांग रही है।

संजय कुमार मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर कांगड़ा के रहने वाले थे। संजय इन्वर्टर कंपनी में काम करता था। वह अपनी पत्नी ज्योति और एक बेटे शुभांक के साथ मेरठ के हाईडिल कालोनी के पास रहते हैं। पिछले कुछ दिन से संजय की तबीयत खराब चल रही थी, जिनका इलाज डा. पीके शुक्ला की देखरेख में चल रहा था।

सांस लेने में दिक्कत की शिकायत थी। टेस्ट में खून की कमी आई और डॉक्टर ने संजय को खून चढ़ाने की सलाह दी। 31 दिसंबर की देर रात संजय को गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां उनका कउव में इलाज चल रहा था।

ज्योति ने बताया कि रात को जब वह घर खाना खाने जाती थीं तो स्टाफ को बताकर जाती थी। क्योंकि वैसे भी स्टाफ अंदर जाने नहीं देता था। घर पहुंचते ही अस्पताल से फोन आ गया। कॉलर ने बताया कि उनके पति की दूसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई है।

वहां से दौड़ते हुए घर आई। देखा संजय जहां गिरे वहां खून ही खून था। सब कुछ खत्म हो गया था। ज्योति ने कहा कि 15 मिनट के अंतराल में ही कुछ ऐसा हुआ है, जिसे छिपाने का प्रयास हो रहा है।
ज्योति ने कहा कि चार यूनिट खून के लिए हॉस्पिटल ने उनके पति की जान ले ली है। सवाल उठाए कि क्या शरीर का चार यूनिट खून कम होने से कोई व्यक्ति इतनी क्रिटिकल कंडीशन में पहुंच जाता है कि उसे आईसीयू में रखना पड़ता है। संजय को कोई बीमारी नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया जाता था। हॉस्पिटल का बड़ा बिल बनाने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा गया।

खिड़की इतनी ऊंची तो कैसे कूदे संजय

ज्योति का कहना है कि संजय को तीन यूनिट खून चढ़ चुका था और चौथा यूनिट खून शनिवार को चढ़ना था। उससे पहले ही संजय की मौत हो गई। संजय की हालत से वह वाकिफ थीं, इसलिए सवाल उठा रही हैं। पत्नी ज्योति का कहना है कि इतनी कमजोरी में संजय बाथरूम की खिड़की तक कैसे चढ़े। खिड़की के आस पास खून लगा है। इसका मतलब गिरने से पहले ही संजय के शरीर से खून निकल रहा था।

मैं खुद हैरान हूं, उसने ऐसा क्यों किया?

मरीज का इलाज करने वाले डॉ पीके शुक्ला ने कहा कि मरीज को एनीमिया की समस्या थी, तीन यूनिट खून उनको अभी तक चढ़ाया जा चुका था। मरीज से जब मेरी बात हुई तो वह आज कह रहा था कि मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं। मानसिक रूप से मरीज बिल्कुल स्वस्थ था, मैं खुद हैरान हूं कि उसने ऐसा क्यों किया। हालांकि एक बात मैंने देखी कि मरीज से उसके परिजन कम मिलने आते हैं। शायद उसकी पत्नी या किसी परिजन से कोई विवाद हुआ हो, जिसको लेकर उसने ऐसा कदम उठाया हो।

फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी रात में लोकप्रिय अस्पताल पहुंचे थे। उनके साथ इंस्पेक्टर नौचंदी ईलम सिंह भी रहे। उन्होंने कउव के स्टाफ से पूछताछ की और फिर फोरेंसिक टीम को बुला लिया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और लौट गई। तब तक बाथरूम और खून वाले स्थान तक किसी को जाने नहीं दिया गया।

संजय नाम का मरीज 31 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था। उसके बाद में आज आईसीयू में ही था। वह टॉयलेट जाने के लिए उठा। उसके साथ एक स्टाफ उसको लेकर गया। स्टाफ बाहर खड़ा हुआ था। मरीज टॉयलेट के अंदर था, पहले वह बाहर आया, फिर दोबारा से अंदर गया उसने गेट बंद कर लिया। शीशा तोड़कर बाहर की तरफ कूद गया। -परमजीत रावत, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, लोकप्रिय अस्पताल

Related articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

14,000FansLike
6,000SubscribersSubscribe

Latest posts