शारदा रिपोर्टर, मेरठ। भारत में निजी विद्यालयों द्वारा अवैध फीस वसूली एवं अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने की मांग को लेकर शुक्रवार को दर्जनों सपा कार्यकर्ताओं ने कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने योगी सरकार को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बताया कि, हम जनपद मेरठ के अभिभावकों एवं आम नागरिकों की ओर से आपका ध्यान एक अत्यंत गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। जिसके कारण स्कूली बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
मेरठ में स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने बढ़ी हुई फीस को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई। सपा नेताओं ने कहा कि निजी स्कूल अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने फीस नियंत्रण के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और अभिभावक शामिल हुए। सपा कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि, वर्तमान समय में देशभर, विशेषकर जनपद मेरठ में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूली की जा रही है।जो यह दर्शाता है कि, विद्यालय प्रशासन द्वारा निम्नलिखित प्रकार से अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
हर वर्ष बिना किसी स्पष्ट कारण के फीस में अत्यधिक वृद्धि। अनिवार्य रूप से महंगी किताबें, यूनिफॉर्म एवं स्टेशनरी केवल स्कूल से ही खरीदने का दबाव। स्मार्ट क्लास,एक्टिविटी, वार्षिक उत्सव आदि के नाम पर अतिरिक्त व अनावश्यक शुल्क। परिवहन (बस) शुल्क में अत्यधिक बढ़ोतरी। फीस न देने पर छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना या कक्षा से वंचित करना। यह स्थिति न केवल मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रही है, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार का भी हनन कर रही है। इसलिए सपा कार्यकर्ता भाजपा सरकार से यह मांग करते हैं कि, निजी विद्यालयों की फीस निर्धारण के लिए सख्त नियम बनाए जाएं एवं उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
सभी प्रकार के अतिरिक्त एवं अनावश्यक शुल्कों पर तत्काल रोक लगाई जाए। प्रत्येक जिले में एक फीस नियामक समिति गठित की जाए, जिसमें अभिभावकों की भागीदारी भी सुनिश्चित हो। शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु एक हेल्पलाइन/पोर्टल शुरू किया जाए। दोषी विद्यालयों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाए। ताकि, स्कूली बच्चों के अभिभावकों को राहत मिल सके।