HomeTrendingसैय्यद बाबा की मजार पर बुलडोजर चला

सैय्यद बाबा की मजार पर बुलडोजर चला

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रातों-रात जमीन समतल की, पौधे लगाए; मौलाना बोले आठ सौ साल पुरानी थी


इटावा। सैयद बाबा की मजार को ढहा दिया गया। सात घंटे में तीन बुलडोजरों ने मजार को तोड़ डाला। रातों-रात जगह समतल कर पेड़ लगा दिए गए। मजार के केयरटेकर का दावा है कि मजार 800 साल पुरानी थी।

बुधवार शाम 6 बजे वन विभाग की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची। 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी मजार तक जाने वाले रास्ते पर तैनात कर दिए। किसी के आने-जाने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हुआ। रात एक बजे तक पूरी मजार हटा दी गई।

गुरुवार सुबह जब लोग मौके पर पहुंचे तो मजार की जगह पौधे लगे मिले। 3000 स्क्वायर फीट में बनी यह मजार इटावा शहर से डेढ़ किलोमीटर दूर बीहड़ के फिशर वन क्षेत्र में स्थित थी। मजार ‘बीहड़ वाले सैयद बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थी।

फरवरी में यहां उर्स का आयोजन होता था, जिसमें 5 से 7 हजार लोग शामिल होते थे। इस बार फरवरी में उर्स नहीं हुआ। जनवरी में इसकी शिकायत सीएम पोर्टल पर की गई थी। इसके बाद वन विभाग ने जांच की और मजार हटाने के निर्देश दिए। मजार के केयरटेकर कोर्ट गए, लेकिन उनकी अपील खारिज हो गई। बुधवार दिन में मजार के केयरटेकर ने मजार से सामान निकाल लिया था।

3 जनवरी, 2026 को हिंदू संगठनों ने आईजीआरएस पोर्टल के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की कि यह मजार अवैध है। 5 जनवरी को डीएम कार्यालय को आदेश मिला कि मजार वन विभाग की जमीन पर बनी है, इसकी जांच कर रिपोर्ट पेश की जाए। इसके बाद वन विभाग ने जांच शुरू की।

जांच में वन रेंज अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने पाया कि मजार फिशर वन के कंपार्टमेंट नंबर-3 में स्थित है। वन विभाग के रिकॉर्ड और 1916, 1936 व 1946 के राजपत्रों के अनुसार यह जमीन वन विभाग के नाम दर्ज है। टीम ने मौके पर जाकर जमीन की नपाई की। 23 जनवरी को वन विभाग ने मजार पर होने वाली धार्मिक गतिविधियों और इबादत पर रोक लगा दी। उसी दिन वन विभाग की ओर से जिला वन अधिकारी की अदालत में वाद (याचिका) दायर किया गया।

मजार पक्ष ने जवाब देने के लिए समय मांगा, लेकिन 16 फरवरी तक जवाब दाखिल नहीं किया। इसके बाद उन्हें 20 फरवरी और फिर 23 मार्च तक की मोहलत दी गई। 28 मार्च को अंतिम मौका दिया गया, लेकिन मजार से जुड़े जरूरी दस्तावेज पक्षकार पेश नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि भूमि पर उनका कोई वैध अधिकार नहीं है और मजार हटाई जाए।

मजार के केयरटेकर फजले इलाही ने जिला वन अधिकारी के आदेश के खिलाफ कानपुर स्थित वन संरक्षक के समक्ष अपील दाखिल की और ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त करने की मांग की। हालांकि सुनवाई के बाद वन संरक्षक ने भी अपील खारिज कर दी।

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