शारदा रिपोर्टर मेरठ। वाहन प्रदूषण जांच के लिए ओटीपी आधारित प्रक्रिया में आ रही तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं को लेकर सोमवार को पीयूसी यूनिफॉर्म मेरठ के दर्जनों सदस्यों ने मेरठ कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान उन्होंने एक ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बताया कि, इस पत्र के माध्यम से प्रदेश में लागू की गई नई प्रदूषण जांच के लिए ओटीपी’ व्यवस्था से उत्पन्न हो रही गंभीर समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि, नियम का उद्देश्य पारदर्शिता लाना है, जो सराहनीय है, किंतु धरातल पर आम जनता और वाहन स्वामियों को निम्नलिखित तीन मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पंजीकृत मोबाइल नंबर का निष्क्रिय होना है। जबकि, अधिकांश पुराने वाहनों के साथ जो मोबाइल नंबर लिंक हैं, वे या तो बंद हो चुके हैं या बदल चुके हैं। ऐसे में ओटीपी न आने के कारण प्रदूषण केंद्रों पर वाहन स्वामियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि, आधार और मोबाइल लिंक में विसंगति को कई मामलों में वाहन पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए इसे स्वयं करना संभव नहीं हो पा रहा है।
भारी चालान का मानसिक दबाव: वर्तमान में प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने पर 10,000 रुपये के चालान का प्रावधान है। तकनीकी खामी के कारण ओटीपी ना आना, सर्टिफिकेट न बन पाना और सड़क पर भारी जुमार्ना होना आम जनता के लिए उत्पीड़न जैसा है। इसलिए हम सभी यह मांग करते हैं कि, विकल्प-ए के अंतर्गत जांच केंद्रों को ही ‘मोबाइल नंबर अपडेट’ करने का अधिकार सीमित रूप से दिया जाए। विकल्प-8 के अंतर्गत बायोमेट्रिक या आधार-आधारित सत्यापन की वैकल्पिक सुविधा शुरू की जाए।
जब तक डेटा पूरी तरह अपडेट नहीं हो जाता, तब तक पुरानी प्रक्रिया और नई प्रक्रिया ओटीपी दोनों को कुछ समय के लिए समानांतर रूप से चलने दिया जाए। ताकि, पीयूसी यूनिफॉर्म मेरठ के सदस्यों को किसी भी असुविधाओं का सामना नहीं करना पड़े।


