HomeEducation NewsMeerut: क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी माइक्रोवेव-सहायक संश्लेषण तकनीक

Meerut: क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी माइक्रोवेव-सहायक संश्लेषण तकनीक

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– चरक स्कूल आॅफ फामेर्सी में पर कार्यशाला आयोजित।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के चरक स्कूल आॅफ फामेर्सी में माइक्रोवेव-एसिस्टेड सिंथेसिस पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और गुरुकुल कांगरी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के बीच हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत शैक्षिक एवं अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

 

 

कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. बिंदु शर्मा (हेड, जूलॉजी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय), प्रो. विपिन कुमार (हेड, फामेर्सी विभाग, गुरुकुल कांगरी विश्वविद्यालय), डॉ. शिवम मिश्रा, डॉ. अमित सेहवाल एवं श्री हीरा लाल द्वारा किया गया। डॉ. वैषाली पाटिल, प्रिंसिपल, फामेर्सी ने अपने मार्गदर्शन से कार्यक्रम को सफल बनाया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को नवीन तकनीकी जानकारी प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा दिखाना भी है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. विभु साहनी, प्रोफेसर एवं हेड, फामेर्सी विभाग, मेडिकल कॉलेज मेरठ तथा फामेर्सी काउंसिल आॅफ इंडिया के सदस्य ने आयोजन समिति एवं प्रतिभागियों की सराहना की। उन्होंने इस प्रकार के तकनीकी और वैज्ञानिक आयोजनों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. साहनी ने कहा, माइक्रोवेव-सहायक संश्लेषण तकनीक विज्ञान और फामेर्सी के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। इसे अधिक से अधिक शोध एवं प्रयोगशाला स्तर पर लागू किए जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर प्रो. शैलेंद्र शर्मा, डीन, एग्रीकल्चर ने कहा इस प्रकार के सेमिनार छात्रों और शोधकतार्ओं को नई तकनीकों के बारे में सीखने तथा उन्हें अपने कार्यों में लागू करने का अवसर प्रदान करते हैं। यह न केवल विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति को बढ़ावा देता है, बल्कि कृषि एवं किसान हित में भी सुधार ला सकता है।

कार्यशाला में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे, जिससे शैक्षिक आदान-प्रदान और भविष्य में अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहन मिला। इस अवसर पर अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का योगदान दिया, जिससे कार्यशाला और अधिक लाभकारी सिद्ध हुई।

यह कार्यशाला माइक्रोवेव-एसिस्टेड सिंथेसिस की तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर केंद्रित थी, जो रासायनिक एवं औषधीय अनुसंधान में एक नवीन एवं प्रभावी तकनीक मानी जाती है। इस कार्यशाला के माध्यम से छात्र एवं शोधकर्ता इस तकनीक के उपयोग और इसके लाभों को समझ सके।

कार्यशाला की आयोजन टीम में प्रमुख रूप से मिस मेघा गुप्ता, मिस यशिका, मिस आकांक्षा एवं राजन कौशिक शामिल रहे, जिन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में डॉ. मीनू तेवतिया एवं डॉ. निखिल भी उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यशाला के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

 

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