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युगांडा में फंसे भारतीय लौटे वतन, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने विदेश मंत्री को लिखा था पत्र

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युगांडा में फंसे भारतीय अपने देश लौट आए

शारदा रिपोर्टर मेरठ। युगांडा में फंसे भारतीय मजदूर अशोक कुमार और कुछ और भी मजदूर वापस आए हैं। कुछ दिनों पहले अशोक ने युगांडा से वीडियो जारी किया था। जिसमें उन्होंने बंधक बनाए जाने की बात कही और भारत सरकार से मदद मांगी थी। जिसके बाद राज्यसभा सांसद डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उनको भारत लाने की कोशिशें शुरु की। जिनकी मेहनत रंग लाई है।

मेरठ के राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखकर युगांडा से मजदूरों की सकुशल वापसी की मांग की थी। जिसके बाद अब वहां फंसे कुछ मजदूरों की वापसी हुई है। रविवार को राज्यसभा सांसद डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने अपने आवास पर पत्रकार वार्ता कर बताया कि यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही प्रयासों का परिणाम है जो आज युगांडा में फंसे भारतीय एकबार फिर वापिस लौट आए है।

उन्होंने कहा कि हमने लोगों को वतन वापसी की कोशिश की और लोग वापिस लौट आए। वहीं अशोक के भाई राहुल ने बताया कि पांच मार्च को वह कुल सात लोग गन्ना मिल में नौकरी करने गए थे आरोप लगाया है कि खतौली निवासी एक युवक युगांडा की एचके शुगर मिल में खुद को जीएम बताकर उन्हें नौकरी दिलाने की बात कहकर साथ ले गया था। अशोक के साथ उत्तर प्रदेश के कुल चार, उत्तराखंड, हरियाणा और बिहार से एक-एक युवक भी साथ गए थे। जिसके बाद राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मंत्रालय में पत्र भेजा।

जिसमें उन्होंने लिखा कि युगांडा में 7 भारतीय फंसे हैं। उन्हें वापस लाने का प्रयास किया जाएं। मेरठ के करनावल निवासी अशोक शर्मा, पटना के मृत्युंजय कुमार, हरियाणा के ऋषि पाल, उत्तराखंड निवासी योगेंद्र कुमार, मुजफ्फरनगर के योगेश कुमार, सहारनपुर के जसवीर सिंह हैं। जिनको जीएस शुगर लिमिटेड ने भट्टी में झोंकने की धमकी दी है। इन लोगों के पासपोर्ट और दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। जल्द से जल्द जीएस शुगर लिमिटेड से बात कर इन लोगों को भारत वापस लाया जाए। जिसके बाद डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी की कोशिश रंग लाई और लोगों की वतन वापसी हुई।

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