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पराली जलाने पर जुर्माना लगाया तो होगा आंदोलन, किसान यूनियन (आजाद) ने मेरठ कलक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

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– किसान यूनियन (आजाद) ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर दी चेतावनी।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (आजाद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान के नेतृत्व में किसानों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी और दवाओं की व्यवस्था न होने पर जिला प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे भारी जुमार्ने और मुकदमों का विरोध किया।

किसानों का कहना है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के आधार पर पूरे प्रदेश में पराली जलाने के लिए किसानों पर जुमार्ना और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, एनजीटी के उसी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी, दवाइयां और बेलर जैसी सुविधाएं प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।

यूनियन ने मांग की है कि जब तक किसानों को एनजीटी के आदेशानुसार मशीनरी, दवाइयां और बोनस नहीं मिल जाता, तब तक जुमार्ने और मुकदमों की कार्रवाई रोकी जाए। उनकी प्रमुख मांगों में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के फैसले के अनुसार 2019 से लंबित 100 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस व सहायता तुरंत जारी करना और बेलर, चॉपर सहित अन्य मशीनें – संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है, ताकि किसानों को पराली जलाने के लिए मजबूर न होना पड़े।

किसानों ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई विभिन्न रिपोर्टों और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा दायर शपथपत्रों के अनुसार, वायु प्रदूषण में किसानों का योगदान केवल 2-11 प्रतिशत है। उन्होंने मांग की कि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार लगभग 90 प्रतिशत अन्य स्रोतों पर भी प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत कानूनी कार्रवाई होनी आवश्यक है।

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