हस्तिनापुर। ज्येष्ठ दशहरा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने गंगा के घाटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। सुबह से ही मखदुमपुर और भीकुंड घाट पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने “हर-हर गंगे” और “गंगा मैया की जय” के जयघोष के साथ गंगा स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

धार्मिक मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसी विश्वास के साथ लोगों ने गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार की सुख-शांति की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने दीपदान, दान-पुण्य और हवन भी किया।

सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम
घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। प्रशासन द्वारा साफ-सफाई, चिकित्सा सहायता और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई। और घाटों पर भजन-कीर्तन तथा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। गंगा दशहरा के इस पावन पर्व ने श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

गंगा में स्नान करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति
हिंदू धर्म में गंगा नदी को माँ का दर्जा दिया गया है और गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ दशहरा जैसे पवित्र अवसरों पर गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचकर श्रद्धा और भक्ति के साथ स्नान करते हैं।
पुराणों में वर्णित है कि माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर मानव कल्याण के लिए अवतरित हुई थीं। उनके जल को पवित्र और जीवनदायिनी माना गया है। मान्यता है कि गंगा स्नान से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। श्रद्धालु स्नान के बाद पूजा-पाठ, दान-पुण्य और भगवान का स्मरण कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। वैदिक परंपरा के अनुसार गंगा जल में दिव्य शक्ति का वास माना गया है। इसलिए गंगा स्नान केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और आत्मिक शांति का प्रतीक भी है।


