पांच गांवों की सरकारी जमीन हड़पने का आरोप, पूर्व मंत्री की शिकायत पर हुई कार्रवाई
संभल। जिले में सरकारी कृषि भूमि के आवंटन में बड़े पैमाने पर हुए कथित फजीर्वाड़े का मामला सामने आया है। एडीएम (न्यायिक) की जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं मिलने के बाद डीएम अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर गुन्नौर थाने में 18 नामजद लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामला पांच गांवों की सरकारी कृषि भूमि के अवैध आवंटन और राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर से जुड़ा है। इस पूरे प्रकरण की शिकायत पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री स्तर तक की थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई। बबराला के राजस्व निरीक्षक नदीम अहमद की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर गुन्नौर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस के मुताबिक, एडीएम (न्यायिक) सौरभ कुमार पांडेय की जांच रिपोर्ट में सरकारी कृषि भूमि के आवंटन में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद डीएम अंकित खंडेलवाल ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
जांच के अनुसार यह मामला गुन्नौर क्षेत्र के पांच गांवों—होतमगढ़ी, बिचपुरी सैलाब, हीरापुर, रसूलपुर और हुसैनपुर सैलाब—से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 1987 से 2011 के बीच करीब 20 कृषि भूमि आवंटन पत्रावलियों के माध्यम से श्रेणी-6 की सरकारी भूमि का नियमों के विपरीत आवंटन कराया गया। इसके लिए तत्कालीन राजस्व एवं चकबंदी अधिकारियों को गुमराह कर सरकारी जमीन अपने परिजनों और अन्य लोगों के नाम दर्ज कराई गई।
तहरीर में मुख्य आरोपी धर्मपाल सिंह यादव पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दोनों पत्नियों, तीन पुत्रों, दो पुत्रियों, तीन पुत्रवधुओं, तीन भाइयों, तीन भतीजों और कुछ कथित बेनामी व्यक्तियों के नाम पर सरकारी भूमि दर्ज कराई। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ ऐसे लोगों के नाम भी अभिलेखों में दर्ज हैं, जिनकी पहचान तक ग्रामीण नहीं बता सके।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, फर्जी आवंटनों के आधार पर आधार वर्ष खतौनी, सीएच-45, खाता संख्या 85, 97 और 101 सहित चकबंदी अभिलेखों में भी कथित रूप से हेरफेर की गई। वर्ष 2008 और 2009 में पारित आदेशों के जरिए गाटा संख्या और भूमि के रकबे में बदलाव कर रिकॉर्ड संशोधित कराए गए। अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार श्रेणी-6 की सरकारी भूमि पर संक्रमणीय अधिकार उत्पन्न नहीं किए जा सकते थे, फिर भी नियमों की अनदेखी कर नाम दर्ज कराए गए।
इस मामले की शिकायत वर्षों से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पूर्व मंत्री अजीत कुमार उर्फ राजू, कुंवरपाल और सुगढ़पाल द्वारा मुख्यमंत्री स्तर तक की जाती रही। शिकायतों के बाद विभिन्न स्तरों पर जांच हुई, जिनमें अनियमितताओं के संकेत मिले। इसके बावजूद संबंधित पक्ष भूमि बचाने के लिए सिविल न्यायालय, एडीएम कोर्ट, अपर आयुक्त मुरादाबाद, राजस्व परिषद लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ता रहा।
पुलिस ने धर्मपाल सिंह यादव, ठ्ठरपाल, छत्रपाल, चंद्रपाल पुत्र हनुमत सिंह, विकास, अजयपाल, ओमपाल पुत्र धर्मपाल, प्रेमलता, प्रेमवती, सावित्री उर्फ देवानिया, अनिता, अनुराधा, सेनवती, रश्मि, गुड्डो उर्फ रामेश्वरी, जगतपाल, विजयपाल, जुगेंद्र पुत्र चंद्रपाल और मूर्ति पत्नी छत्रपाल समेत 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता/आईपीसी की धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से संबंधित धाराओं 420, 467, 468 और 471 के साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 2 एवं 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गुन्नौर थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर 18 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।