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विश्व के पहले भारतदुर्गा मंदिर का हुआ शिलान्यास; मोहन भागवत ने कहा- ‘शक्ति के बिना कुछ नहीं

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नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम डॉ. आबाजी थत्ते सेवा और अनुसंधान संस्थान के जमठा क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां भूमि पूजन और शिलान्यास उनके हाथों संपन्न हुआ। इस मौके पर कई प्रमुख धमार्चार्य और संत मौजूद रहे, जिनमें गुरुशरणानंद महाराज, श्री जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज, स्वामी मित्रानंद महाराज, साध्वी ऋतंभरा देवी और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री प्रमुख रूप से शामिल थे।

 

 

मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कहा, ‘मंदिर हो गया, उसकी व्यवस्था भी बनेगी, यहां रोज पूजा-अर्चना होगी, विधिवत होगी। हम लोग भी आते रहेंगे। भारत दुर्गा की पूजा केवल मंदिर के पुजारी एवं व्यवस्थापक करेंगे, इससे नहीं होगा। वह पूजा हम सबको करनी पड़ेगी और उसकी पूजा की विधि अलग है। हमें निर्भय होना पड़ेगा। अभी देखेंगे तो पता नहीं चलता कि भारत विश्व गुरु होने वाला है। आज विचार कीजिए दुनिया की जो हालत है, उसमें अगर भारत का रास्ता दुनिया ने नहीं लिया तो भविष्य क्या है। संतों के मुख से जो घोषणा हुई है, भारत विश्व गुरु बनेगा।

संघ प्रमुख ने कहा, भारत दुर्गा की पूजा केवल पुजारी या प्रबंधन समिति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. हम सभी को पूजा करनी होगी क्योंकि इसकी विधि अलग है। जैसे भगवान की पूजा करने के लिए हमें शिव जैसा बनना पड़ता है, वैसे ही हमें स्वयं को भी बदलना होगा. अगर हमें भारत की पूजा करनी है तो हमें भारत को जानना होगा, समझना होगा और उसे अपनाना होगा।

उन्होंने कहा, अंग्रेजों की डेढ़ सौ साल की गुलामी के कारण हम पर पश्चिमी प्रभाव चढ़ गया है, उसे हमें उतारना होगा। अपने रोजमर्रा के जीवन से लेकर हर स्तर तक हमें भारतीयता को अपनाना होगा। भाषा और व्यवहार से इसकी शुरूआत करनी होगी। हमें छोटे-छोटे कदमों से शुरूआत करनी होगी। जैसे चींटी धीरे-धीरे चलती है, लेकिन दूर तक पहुंच जाती है वैसे ही हमें आगे बढ़ना है।

मोहन भागवत ने कहा, आज भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर जो अपेक्षाएं व्यक्त की गई हैं, वे संयोग नहीं बल्कि साकार होने वाली हैं। हमें निर्भय बनना होगा और अपने तथा अपने परिवार का जीवन स्वयं गढ़ना होगा। परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए। हमारी कल्पना पूरी होगी या नहीं, इस पर संदेह हो सकता है लेकिन जो ठान लिया है, वह अवश्य होगा।

उन्होंने कहा, जैसे राम मंदिर का निर्णय इतने वर्षों बाद आया, वैसे ही कई चीजें समय आने पर होती हैं। इसलिए यह सोचने में समय न गंवाएं कि क्या होगा और कैसे होगा, बल्कि अपने कदम आगे बढ़ाते रहें। भारत माता की पूजा हर व्यक्ति रोज करेगा तो भारत विश्व गुरु बनेगा, शक्तिशाली और समृद्ध बनेगा। जो कुछ भारत ने खोया है, वह सब वापस प्राप्त करेगा।

संघ प्रमुख ने कहा, संतों ने जो कहा है, वह अवश्य होगा। यदि हम संकल्प लेते हैं तो उसके अनुरूप शक्ति भी खड़ी होती है। समय आने पर सब कुछ होता है। इसलिए आज से ही हमें भारत माता की पूजा शुरू करनी चाहिए, खुद भी करें और अपने परिवार को भी इसके लिए प्रेरित करें।

 

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