HomeTrendingखेती-किसान: खाद के सही डोज से मिलेगा खेती में मुनाफा

खेती-किसान: खाद के सही डोज से मिलेगा खेती में मुनाफा

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– ICAR ने चलाया ‘संतुलित उर्वरक अभियान’।


नई दिल्ली। भारत में खेती को ज्यादा उपजाऊ, टिकाऊ और किसानों के लिए फायदेमंद बनाने के उद्देश्य से चलाया गया `संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान` बड़ी सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद [{ Indian Council of Agricultural Research }(ICAR)] की ओर से 24 अप्रैल 2026 को साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के जरिए लाखों किसानों तक सही तरीके से खाद के उपयोग करने का संदेश पहुंचाया गया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना है कि खेत में खाद का इस्तेमाल सही मात्रा, सही समय और सही प्रकार से किया जाए। इससे न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि फसलों का उत्पादन बढ़ेगा, लागत कम होगी और किसानों की कमाई बढ़ेगी।

 

 

अभियान के तहत पूरे भारत में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। आंकड़ों के अनुसार, 3512 जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए, जिनमें शिविर, संगोष्ठी, किसान बैठकें, फील्ड डे, हार्वेस्टर और ट्रैक्टर रैलियां शामिल रहीं। इन कार्यक्रमों के जरिए करीब 2.44 लाख किसानों तक सीधा संदेश पहुंचा। इसके अलावा किसानों को खेतों में जानकारी देने के लिए 1926 प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें हरी खाद, बायोफर्टिलाइजर और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को दिखाया गया। किसानों को बताया गया कि रासायनिक खाद पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय जैविक खाद अपनाना ज्यादा फायदेमंद है। अभियान के दौरान 4709 प्रमुख स्थानों जैसे मंडी, चौराहा, पंचायत भवन और बाजारों में बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए।

वहीं, 1568 इनपुट डीलर्स इंटरफेस कार्यक्रमों के जरिए खाद विक्रेताओं को भी जागरूक किया गया, ताकि वे किसानों को सही सलाह दे सकें। गांव स्तर पर भी इस अभियान को अच्छा समर्थन मिला, 1636 सरपंच सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिनमें वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG) और किसान समूहों ने भाग लिया. इससे गांव-गांव तक अभियान का संदेश पहुंचा।

अभियान में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखी। 18 VIP संदेशों के माध्यम से मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने की अपील की। मीडिया के जरिए भी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। 159 रेडियो और कम्युनिटी रेडियो वार्ताएं, 105 टीवी कार्यक्रम और डिजिटल माध्यमों से प्रचार किया गया। वहीं, 1252 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 33,644 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सोशल मीडिया पर भी अभियान को बड़ी सफलता मिली। व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए यह संदेश 17.88 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचा।

`संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान` को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाते हैं, तो मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहेगी, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती मजबूत होगी। अभियान का नारा भी यही संदेश देता है-“आज का संकल्प, कल की समृद्धि!”।

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