– सेंट्रल मार्केट सहित अन्य निर्माण ध्वस्तीकरण को लेकर व्यापारियों की बैठक में गुस्साए व्यापारियों ने किया ऐलान।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। सेंट्रल मार्केट प्रकरण ने अब खुला आंदोलन का रूप ले लिया है। व्यापारियों ने आवास एवं विकास परिषद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आड़ लेकर चयनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। व्यापार बचाव संघर्ष समिति के बैनर तले सेंट्रल मार्केट में शनिवार को बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सभी व्यापारियों ने स्वर में स्वर मिलाकर कहा कि अगर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई तो जो व्यापारी भाजपा के लिए दरी बिछाना जानते हैं वो इस सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करेंगे।

मेरठ की सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण कर कार्रवाई को लेकर व्यापारियों ने आज बंदी के साथ एक आम पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में शहर के सभी व्यापारियों ने भी समर्थन दिया है। न्यायालय द्वारा दिए आदेश के बाद से ही व्यापारियों ने बेचैनी बढ़ती जा रही है। सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोकने के लिए व्यापारी लगातार विरोध कर रहे हैं। तमाम जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखने के बाद भी कोई समाधान न होने के बाद वह कभी प्रदर्शन करते हैं तो कभी रोजी- रोटी बचाओ के बैनर लगाते हैं।

बैठक के दौरान नेता सतीश गर्ग ने कहा कि, परिषद के अधिकारी 661/6 परिसर में 22 दुकानों का ध्वस्तीकरण कर चुके हैं। अब पूरे सेंट्रल मार्केट को उजड़ने के लिए 15 दिन के नोटिस जारी किए जा रहे हैं, ऐसा होने नहीं देंगे। अपने व्यापार को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 90 दिन के भीतर नीति बनाकर राहत देने का विकल्प था, लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस नीति लागू नहीं की।

उन्होंने कहा कि सेंट्रल मार्केट को बाजार स्ट्रीट घोषित करने और मिश्रित आबादी में शामिल करने का प्रस्ताव लखनऊ भेजा गया था, जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। व्यापारी नेता वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि आवास एवं विकास परिषद की प्रत्येक योजना में 5 प्रतिशत कमर्शियल भूमि का प्रावधान है, जबकि सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में मुश्किल से एक प्रतिशत भूमि छोड़ी गई। पूर्व अधिकारियों की ओर से 5 प्रतिशत कमर्शियल का प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी कही गई थी। लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ।
उन्होंने नई आवास नीति 2025 का हवाला देते हुए कहा कि 9 मीटर तक की सड़कों पर आवासीय भवनों में कमर्शियल उपयोग को शुल्क लेकर नियमित करने का प्रावधान है, लेकिन मेरठ में इसे लागू नहीं किया गया।

व्यापारी संजीव पुंडीर ने आरोप लगाया कि, समान परिस्थितियों में अलग- अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने हापुड़ अड्डा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकारी भूमि पर पुराने निमार्णों को राहत दी गई, जबकि सेंट्रल मार्केट में निजी भूमि पर वर्षों से चल रहे व्यापार को ध्वस्तीकरण की श्रेणी में लाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
समिति ने घोषणा करते हुए कहा कि, आमसभा में सभी व्यापारिक संगठनों की सहमति से आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही मुख्य सचिव और आवास आयुक्त को ज्ञापन भेजकर एक समान नीति लागू करने की मांग की जाएगी।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो वे चुनाव में खुलकर विरोध करेंगे और जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार करेंगे। समिति का कहना है कि अब एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार है और 14 फरवरी की आमसभा इस आंदोलन की दिशा तय करेगी।
लगभग 700 दुकानदारों को नोटिस: सेंट्रल मार्केट में बीती 27 जनवरी को लगभग 700 दुकानदारों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। जिसमें 6 हफ्तों के अंदर अवैघ निर्माण पर कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके बाद से कुछ व्यापारियों ने अपनी दुकानें तोड़कर पीछे भी हटाई थी।


