आधे घंटे झटपटाता रहा, रातभर घरवाले खोजते रहे, आठ घंटे बाद सुबह सफाईकर्मियों ने निकाला
औरैया। सदर कोतवाली क्षेत्र में घर के बाहर खेल रहा 3 साल का मासूम बच्चा खुले नाले में गिर गया। दम घटने से उसकी मौत हो गई। बच्चा गुरुवार शाम करीब 8 बजे से ही लापता था और शुक्रवार सुबह नाले की सफाई के दौरान सफाई कर्मचारियों को उसका शव मिला।
परिजनों ने बताया कि शाम को वह अपने घर के बाहर खेलते समय अचानक गायब हो गया था। काफी देर तक जब वह नहीं लौटा, तो परिजनों और पड़ोसियों ने रातभर उसकी तलाश की। लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला। शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे जब नगर पालिका के सफाई कर्मचारी नाले की सफाई कर रहे थे तब उन्हें बच्चे का शव दिखाई दिया। वे तुरंत उसे अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस हादसे के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया है। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष के सामने स्थानीय लोगों ने जमकर अपना आक्रोश जाहिर किया। लोगों का साफ कहना था कि अगर नगर पालिका ने नाले को ऊपर से स्लैब रखकर ढका होता तो ऐसा नहीं होता।
मृतक बच्चे की पहचान नारायणपुर के रहने वाले राहुल हलवाई के 3 साल के बेटे रोशन के रूप में हुई है। परिवार के लोगों ने बताया कि उन्होंने उसकी काफी तलाश की। रातभर घरवाले और मोहल्ले के लोग मिलकर बच्चे को ढूंढते रहे, लेकिन अंधेरा होने की वजह से उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिल पाया।
शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे जब नगर पालिका के सफाई कर्मचारी इलाके के नाले को साफ करने पहुंचे, तो उन्हें नाले के अंदर एक बच्चे का शरीर दिखाई दिया। कर्मचारियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत बच्चे को नाले से बाहर निकाला और आनन-फानन में उसे 50 शैया संयुक्त अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टरों ने देखते ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही सदर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जैसे ही इस बात की पुष्टि हुई कि नाले में मिला शव रोशन का ही है, वैसे ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। इस दिल दहला देने वाली घटना की खबर मिलते ही नगर पालिका अध्यक्ष अनूप गुप्ता भी मौके पर पहुंचे। वहाँ मौजूद मोहल्ले के लोगों ने नगर पालिका अध्यक्ष के सामने अपना भारी गुस्सा जाहिर किया।
यह पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही है। अगर नगर पालिका ने समय रहते नाले को ऊपर से ढकने के लिए पटिया (स्लैब) रखवाई होती, तो आज एक मासूम की जान नहीं जाती। खुले नालों की वजह से यहाँ हमेशा हादसों का डर बना रहता है।