7 महीने बाद पुलिस ने लौटाया तो मां बोली आखिरी निशानी संभाल कर रखूंगी
कानपुर। साउथ जोन की पुलिस शुक्रवार को 111 खोए हुए मोबाइल लौटाए, खोए हुए मोबाइल लेने वालों में रानी बाजपेई एक ऐसी महिला थी। जिसके लिए वो सिर्फ एक मोबाइल नहीं था, उसके मरे हुए बेटे की आखिरी निशानी था। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी उन्हें मोबाइल सौंपा तो बरबस ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
रानी ने फफकते हुए कहा कि मेरी बेटी नेहा ने 28 साल के बेटे आशीष को किस्तों पर मोबाइल दिलाया था, 6 दिन बाद ही मोबाइल गुम हो गया। जिसके बाद वह परेशान रहने लगाङ्घ मोबाइल के गम में उसने खानाझ्रपीना तक छोड़ दिया था। उसे हैलट अस्पताल में भर्ती कराया, जिसके बाद उसकी 26 अक्टूबर को मौत हो गई। अब यह मोबाइल मेरे बेटे की आखिरी निशानी बनकर रहेगा। एक औलाद थी, जिसको मैने खो दिया है। पुलिसवालों का बहुत शुक्रिया है, जिन्होंने मेरा मोबाइल लौटाया। मूलरूप से कानपुर देहात के गुजराई गांव और वर्तमान में बर्रा विश्वबैंक सी ब्लाक निवासी रानी बाजपेई ने बताया कि उनकी बेटी नेहा ने अपने 28 वर्षीय भाई आशीष बाजपेई को किस्तों पर मोबाइल दिलाया था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए यह मोबाइल आशीष के लिए बेहद खास था। पहली किस्त जमा करने के बाद 20 अक्टूबर 2025 को मोबाइल कहीं गिरकर खो गया।
इससे आशीष को इतना गहरा सदमा लगा कि उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया था। वह लगातार परेशान रहने लगा और उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। पहले उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 अक्टूबर 2025 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को जब डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बरामद मोबाइल रानी बाजपेई को सौंपा तो उन्होंने उसे सीने से लगा लिया।
रुंधे गले से बोलीं, बेटा तो वापस नहीं आएगा, लेकिन उसकी आखिरी निशानी मिल गई है। अब इसी को देखकर उसकी यादों के सहारे जीवन कट जाएगा। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी की मौजूदगी में सर्विलांस टीम ने कुल 111 लोगों को उनके खोए मोबाइल लौटाए। मोबाइल वापस मिलने पर अन्य लोगों के चेहरों पर खुशी थी, लेकिन एक मां के आंसुओं ने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।