नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा मामलों पर डब्लूएमसीसी की 35वीं बैठक बीजिंग में आयोजित की गई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा एवं महासागरीय मामलों के विभाग की महानिदेशक होउ यानची ने किया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत रचनात्मक, सकारात्मक और भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने वाली रही।

बीजिंग में आयोजित की गई बैठक में दोनों देशों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की व्यापक समीक्षा की। साथ ही सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि सीमा क्षेत्रों में शांति कायम रहने से द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की प्रक्रिया को गति मिली है।
वार्ता के दौरान सीमा निर्धारण सीमा प्रबंधन, आपसी समन्वय तंत्र को मजबूत करने तथा सीमा पार सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने विशेष रूप से सीमा पार नदियों से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म की अगली बैठक जल्द आयोजित करने पर जोर दिया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राजनयिक और सैन्य स्तर पर नियमित संवाद एवं संपर्क बनाए रखा जाएगा। इसके लिए उन तंत्रों का भी उपयोग किया जाएगा जिन पर 24वीं स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता के दौरान सहमति बनी थी।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने चीन में आयोजित होने वाली अगली विशेष प्रतिनिधि बैठक की ठोस और व्यापक तैयारियों के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति व्यक्त की। बीजिंग दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सुजीत घोष ने चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक श्लियू जिनसोंग से मुलाकात की। साथ ही उन्होंने चीन के सहायक विदेश मंत्री महामहिम होंग लेई से शिष्टाचार भेंट भी की।


