– पिछड़ा वर्ग आयोग गठन को हरी झंडी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ये पहली कैबिनेट बैठक थी, जिसपर सबकी नजरें टिकी हुई थीं। यूपी कैबिनेट की इस बैठक में ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग, एमओयू को मंजूरी, लखनऊ व आगरा मेट्रो विस्तार के लिए भूमि और लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस इलाज समेत 12 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। योगी कैबिनेट ने यूपी पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने का निर्णय कर बड़ी समस्या दूर कर दी है।

कैबिनेट मीटिंग में नए ओबीसी आयोग को मंजूरी मिल गई है। अब ओबीसी आयोग ही यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण की सीमा को तय करेगा। यूपी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ओबीसी आयोग सभी 75 जिलों में बैठक, जातिवार और आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा के बाद ही आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव आरक्षण की जो सिफारिशें आएंगी, उसके आधार पर आगे की चीजों को तय करेगा।
मॉनसून में बारिश के दौरान और धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई को देखते हुए भी पंचायत चुनाव होना मुश्किल हैं। ऐसे में अक्टूबर-नवंबर के आसपास ऐसा हो सकता है। लेकिन अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव को देखते हुए चार महीने पहले पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए राजनीतिक जोखिम भरा फैसला हो सकता है। पंचायत चुनाव में अक्सर गुटबाजी, वर्चस्व और राजनीतिक टकराव देखा जाता है। दलीय मयार्दाएं तार-तार हो जाती हैं। इसका पार्टी संगठनों पर बुरा असर पड़ सकता है।
यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव, क्षेत्र पंचायत चुनाव और जिला पंचायत चुनाव का मामला काफी समय से लटका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को ओबीसी आयोग के गठन का आदेश दिया है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता ने समय से पंचायत चुनाव कराने की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनाव टालना और ग्राम प्रधान की जगह प्रशासकों को जिम्मेदारी देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।


