– कई रोहिंग्या-बांग्लादेशी भी शामिल।
नई दिल्ली। अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को ले जा रही एक नौका के पलटने से लगभग 250 लोगों के लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने एक बयान में कहा कि यह नौका दक्षिणी बांग्लादेश के टेक्नाफ से मलेशिया के लिए रवाना हुई थी। भारी हवाओं, उबड़-खाबड़ समुद्र और अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण यह नौका डूब गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नौका में लगभग 280 लोग सवार थे और इसने चार अप्रैल को बांग्लादेश छोड़ा था।
हादसे में लापता लोगों में कई बच्चे भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि बोट पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या सवार थे। संभावना है कि इस नौका में सवार रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में स्थित विशाल शिविरों से भागने की कोशिश कर रहे थे, जहां म्यांमार के रखाइन प्रांत से विस्थापित एक मिलियन से अधिक शरणार्थी दयनीय परिस्थितियों में रह रहे हैं।
बांग्लादेश तटरक्षक बल ने बताया कि नौ अप्रैल को इंडोनेशिया जा रहे उसके एक जहाज ने समुद्र से नौ लोगों को बचाया, जिनमें एक महिला भी शामिल थी। इउॠ के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कमांडर सब्बीर आलम सुजान ने एएफपी को बताया कि बांग्लादेशी ध्वजवाहक एम.टी. मेघना प्राइड ने अंडमान द्वीपों के पास गहरे पानी में कुछ लोगों को तैरते हुए देखा और उन्हें बचाया। बचाए गए लोगों को बाद में बांग्लादेश तटरक्षक बल के गश्ती जहाज मंसूर अली को सौंप दिया गया। बचाए गए लोगों में से एक रफीकुल इस्लाम (40) ने अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई।
उन्होंने बताया कि तस्करों ने उन्हें मलेशिया में नौकरी का वादा करके नौका पर चढ़ाया था। उन्हें टेक्नाफ के एक घर में 20-25 अन्य लोगों के साथ अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया था। रफीकुल ने बताया कि नौका चार दिन यात्रा करने के बाद पलट गई और वे लगभग 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे, जब तक कि उन्हें बचा नहीं लिया गया।


