– बिना शर्त माफी स्वीकार नहीं, किताबें वापस; एनसीईआरटी प्रकरण पर सीजेआई सख्त, जांच के आदेश।
नई दिल्ली। एनसीईआरटी की 8वीं क्लास की विवादित बुक पर सीजीआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हम बिना शर्त माफी स्वीकार नहीं करेंगे। जांच होगी कि बुक कैसी छपी। बता दें कि एनसीईआरटी की 8वीं क्लास की सोशल साइंस की बुक में भ्रष्ट ज्यूडिशियरी सिस्टम और पेंडिंग केस के बारे में बताया गया।

सुनवाई में सीजीआई ने कहा कि यह एक साजिश भी हो सकती है। हम बिना शर्त माफी अभी स्वीकार नहीं करेंगे। वरना भविष्य में कोई भी ऐसा करेगा. हम इस संस्थान की गरिमा को नुकसान नहीं पहुंचने दे सकते।
सोलीसिटर जनरल ने कहा कि जो बुक बाजार में छपकर गई थी वो वापस ले ली गई है। सीजेआई ने कहा कि ये बड़ा कैलकुलेटेड मूव है, जिसमें भारतीय न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया गया। पूरा शिक्षक समाज इसे ट्रोल कर रहा है। जस्टिस बागची ने कहा कि डिजिटल युग में एक किताब की हजारों प्रतियां बन गई होंगी। यह कैसे किया गया, यह जानना जरूरी है।
सीजेआई ने कहा कि हम यह कार्यवाही नहीं बंद कर रहे। इसकी गहन जांच की जरूरत है, जो कराई जाएगी। एसजी ने कहा कि बिल्कुल सही है, जो किया गया है उसकी भरपाई आपके मुताबिक ही होनी चाहिए। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी अब वापस ली गई क्लास 8 सोशल साइंस पार्ट 2 टेक्स्टबुक की 38 कॉपियां वापस लेने की कोशिश में लगा है, जो बिक गई थीं। जबकि छपी 2.25 लाख कॉपियों में से 2,24,962 इन्वेंट्री में रह गईं और उन्हें वेयरहाउस में वापस भेज दिया गया है।
उखक ने कहा कि हमारे संविधान बनाने वाले बहुत जागरूक थे और उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि संवैधानिक जिम्मेदारियां तय हों। लेजिस्लेचर, ज्यूडिशियरी और एग्जीक्यूटिव आॅटोनॉमी के साथ काम कर सकें और हमारे देश के डेमोक्रेटिक ताने-बाने को बचा सकें। संवैधानिक रूप से बताई गई सीमाओं को मानते हुए हम चौंक गए जब एक बड़े अखबार ने ग्रेड के लिए सोशल साइंस की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड’ के रिलीज के बारे में एक आर्टिकल छापा, जिसका पहला एडिशन फरवरी 2026 में पब्लिश किया गया था।
सीजेआई ने कहा कि इस चैप्टर में ज्यूडिशियरी के खिलाफ मिली सैकड़ों शिकायतों का खास तौर पर जिÞक्र है, जिससे लगता है कि कोई एक्शन नहीं लिया गया और एक पुराने सीजेआई के भाषण के कुछ शब्द लिए गए हैं, जिससे लगता है कि ज्यूडिशियरी ने खुद ट्रांसपेरेंसी की कमी और इंस्टीट्यूशनल करप्शन को माना है। आर्टिकल में आगे कहा गया है कि लोग ज्यूडिशियरी में अलग-अलग लेवल के करप्शन का अनुभव करते हैं।
सीजेआई ने कहा कि किताब में जो कुछ भी लिखा गया है वो बहुत ही लापरवाही से लिखा गया है, उस पर अपनी राय देने के बजाय, डायरेक्टर ने कंटेंट का बचाव करते हुए जवाब दिया है।


