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Tuesday, January 20, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ: सरकारी प्रमाण देने पर भी व्यापारियों को बता रहे अवैध

मेरठ: सरकारी प्रमाण देने पर भी व्यापारियों को बता रहे अवैध

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– उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल की प्रांतीय बैठक में व्यापारियों ने सरकारी व्यवस्था पर जताई नारागजी।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। मंगलवार को मुंबई बाजार स्थित चैंबर आॅफ कॉमर्स में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश की बैठक हुई। इस दौरान अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने कहा कि जिन दुकानों को सरकार स्वयं कमर्शियल बिजली कनेक्शन, फूड लाइसेंस, माप तौल प्रमाण पत्र, जीएसटी पंजीकरण और एमएसएमई जैसे प्रमाण पत्र जारी करती है, उन्हीं दुकानदारों को आज अवैध बताकर नोटिस, सीलिंग और जुमार्ने का शिकार बनाया जा रहा है। यह सीधा-सीधा व्यापारियों के साथ धोखा और विश्वासघात है।

 

 

उन्होंने कहा कि आवासीय कॉलोनियों में संचालित छोटी दुकानों के साथ हो रहा उत्पीड़न सरकार की नीतिगत विफलता और दोहरे चरित्र को उजागर करता है। अग्रवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार तुरंत स्पष्ट करे कि जब वह कॉलोनियों में व्यवसाय को मान्यता नहीं देना चाहती तो फिर कमर्शियल बिजली कनेक्शन, फुल लाइसेंस, माप तोल विभाग प्रमाण पत्र, जीएसटी नंबर और एमएसएमई पंजीकरण किस आधार पर जारी किए जा रहे हैं? यह दोहरी नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही आवासीय कालोनियों में संचालित छोटी दुकानों को नियमित करने का अध्यादेश जारी कर उत्पीड़न बंद नहीं करती, तो संगठन प्रदेश भर में सड़क से सदन तक आंदोलन करेगा। इसके तहत बाजार बंदी, धरना-प्रदर्शन और विधानसभा घेराव सहित बड़े स्तर पर व्यापारी संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

अलीगढ़ से आये प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि जीएसटी स्लैब में कमी करके सरकार ने वाह वाही तो लूट ली लेकिन उसके दुष्परिणाम व्यापारी को कितने झेलना पड़ रहे हैं इसका उसको जरा भी अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के नाम पर प्रदेश का छोटा और रिटेल व्यापारी आज खुली लूट और संगठित उत्पीड़न का शिकार है।

पीलीभीत से आये वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल महेंद्रू ने कहा कि सरकार ने जब जीएसटी की दरें 28 प्रतिशत से 18 और 12 प्रतिशत से 5 प्रतिशत कीं, तब व्यापारियों को भारी नुकसान में झोंक दिया। जो माल अधिक टैक्स पर खरीदा गया, उसे कम टैक्स पर बेचने को मजबूर किया गया और व्यापारियों का हजारों करोड़ रुपया जीएसटी पोर्टल की आईटीसी में फँसाकर रखा गया। व्यापारी अपने ही पैसे के लिए बैंक को ब्याज दे रहा है और सरकार व्यापारियों की पूँजी रोककर बैठी है। यह सीधा आर्थिक शोषण है। यदि यह पैसा तुरंत व्यापारियों के बैंक खातों में नहीं लौटाया गया तो बाजार पूरी तरह ठप हो जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

बैठक में विजेंद्र पंसारी हापुड, प्रेमचंद गुप्ता गाजियाबाद मनोज जी हाथरस गौरव रोहिल्ला शामली सुशील जैन मेरठ सिद्दीकी मेरठ आदि उपस्थित रहे।

 

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