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Sunday, February 8, 2026
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Homeशहर और राज्यउत्तर प्रदेशसांसद करण भूषण को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

सांसद करण भूषण को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

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  • अवैध खनन पर लगा था 10 लाख जुर्माना, 4.88 करोड़ रॉयल्टी जाम करने का मामला.

गोंडा। कैसरगंज से सांसद करण भूषण सिंह को अवैध खनन मामले में लखनऊ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी फर्म मेसर्स नंदिनी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगे जुर्माने और रॉयल्टी जमा करने के आदेश को कोर्ट ने रद्द नहीं किया है।
हाईकोर्ट ने उन्हें राज्य प्राधिकरण में रिवीजन याचिका दाखिल करने की छूट दी है। जस्टिस शेखर बी सराफ और मंजवी शुक्ला की खंडपीठ ने 21 नवंबर को सांसद की याचिका पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने मेरिट के आधार पर याचिका खारिज करते हुए यह निर्देश दिया।

सांसद करण भूषण सिंह ने अपनी याचिका में 10 लाख रुपए के जुर्माने और 4.88 करोड़ रुपए की रॉयल्टी को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला 2019 का है। 19 और 20 जनवरी 2019 को गोंडा के खनन निरीक्षक और भूतत्व एवं खनिकर्म कार्यालय अयोध्या के सर्वेयर ने गोंडा में खनन पट्टे का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण में स्वीकृत पट्टे से 1.72 लाख घन मीटर अधिक खनन पाया गया था।

तत्कालीन गोंडा डीएम नितिन बंसल ने 15 जून 2019 को मेसर्स नंदिनी इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके साथ ही बालू की रॉयल्टी और खनिज मूल की राशि के रूप में 4.88 करोड़ रुपए 15 दिन के भीतर जमा करने का आदेश दिया था। गोंडा खनन विभाग ने इस संबंध में करण भूषण सिंह और उनकी फर्म को कई नोटिस भी जारी किए थे।

नोटिस मिलने के बावजूद जुर्माना और बालू की रॉयल्टी जमा नहीं की गई। जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह और उनकी फर्म को तरबगंज तहसील क्षेत्र के दुगार्गंज ग्राम पंचायत में बालू खनन के लिए पांच साल का पट्टा मिला था। इस कार्रवाई के बाद से सांसद या उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने कोई नया बालू खनन पट्टा नहीं लिया है।

सांसद करण भूषण सिंह ने कहा कि गलत तरीके से जुर्माना लगाया गया था। इसी जुर्माना और रॉयल्टी को हमने रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने राज्य प्राधिकरण में रिवीजन प्रस्तुत करने को लेकर की हुई देरी से छूट दी है। बीजेपी सांसद द्वारा अपने फर्म के माध्यम से खनन निदेशक उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव खनन विभाग, कमिश्नर देवी पाटन मंडल और गोंडा डीएम को इस पूरे मामले में पार्टी बनाया गया था।

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