बाजार की 300 से ज्यादा दुकानें बंद कराईं, 25 फीट ऊंची लपटें उठीं
झासी। बुधवार शाम करीब 5 बजे दो मंजिला बिल्डिंग में भीषण आग लग गई। आग की लपटें करीब 25 फीट तक उठीं और धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दिया। आग चौधरी पेंट हाउस नाम की दुकान में लगी थी। पेंट और केमिकल्स के कारण आग तेजी से फैल गई।
दुकान में रखे पेंट के डिब्बे तेज आवाज के साथ फटने लगे, जिससे आसपास की दो इमारतें भी चपेट में आ गईं। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की 8 गाड़ियां और सेना की मदद ली गई। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद रात 10 बजे आग पर काबू पा लिया गया। प्रशासन ने सुरक्षा के चलते बाजार की 300 से ज्यादा दुकानें बंद कराई थीं।
जिस पेंट की दुकान में आग लगी है, उसके पड़ोस में दोना-पत्तल की दुकान है। जिसे आग लगने के बाद खाली करा लिया गया था। सेना के पहुंचने के बाद अफसरों ने दुकान की दीवार को तोड़ दिया। अब यहां से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की जा रही है।जिस पेंट की दुकान में आग लगी है, उसके पड़ोस में दोना-पत्तल की दुकान है। जिसे आग लगने के बाद खाली करा लिया गया था। सेना के पहुंचने के बाद अफसरों ने दुकान की दीवार को तोड़ दिया। अब यहां से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की जा रही है।
आग के विकराल रूप को देखते हुए प्रशासन ने आर्मी को बुला लिया। कर्नल एस वेंकटरमन के नेतृत्व में फायर फाइटिंग टीम के लगभग 20 जवान 3 दमकल गाड़ियां लेकर मौके पर पहुंचे। पहले कर्नल ने पूरी स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद जवानों ने आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की। तीनों दमकल 3 राउंड पानी लेकर आ चुकी हैं।
दुकान के अंदर लगभग 6 हजार लीटर पेंट है। इसके अलावा लगभग दो हजार लीटर थिनर और तारपिन आॅयल है। इसलिए आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा रहा है। सेना ने पानी में फोम डालकर आग बुझाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ताकि आग बुझाई जा सके।
कारोबारियों ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर और फस्ट फ्लोर पर काफी मात्रा में पेंट रखा था। अभी से दिवाली का स्टॉक कर लिया था। आज सुबह लगभग 10 बजे दुकान खोली थी। शाम लगभग 4 बजे कारोबारी और स्टाफ नीचे था। इस दौरान फस्ट फ्लोर पर आग लग गई। धुआं उठने पर कर्मचारी ऊपर गए और अग्निशमन यंत्र से आग बुझाने की कोशिश की। लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर दिया। यह देख कारोबारी और स्टाफ बाहर आ गया।
जिस चौधरी पेंट हाउस में आग लगी, वो 3 भाइयों की है। इनके नाम अनिल अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और कृष्णकांत अग्रवाल है। दुकान से थोक एवं फुटकर कारोबार होता था। झांसी के अलावा आसपास के जिलों में माल जाता था। आग लगने के बाद तीनों भाई सदमे में हैं।