सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि यह ऐसा मामला नहीं था जहां पति-पत्नी के बीच कोई झगड़ा हुआ हो। पति के खिलाफ क्रूरता के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे, जिसे हाईकोर्ट अपने फैसले में ध्यान में रखने में विफल रहा। पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह तय करना जरूरी है कि क्या घटना की गंभीरता इस हद तक थी कि वह किसी महिला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दे, उसे चोट पहुंचाए या उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दे।
इसके अतिरिक्त, अभियोजन पक्ष का आरोप था कि पति ने पत्नी को उसके परिवार की इच्छा के खिलाफ मायके जाने पर फटकार लगाई थी और फोन पर उससे बात करने से इनकार कर दिया था। यह भी आरोप था कि बातचीत न होने के कारण पत्नी को गंभीर मानसिक पीड़ा हुई, जिससे उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि पति के खिलाफ आरोप का मुख्य आधार फोन पर बात करने से उसका इनकार करना और पत्नी के बिना बताए मायके जाने पर उसकी नाराजगी थी, जिससे आहत होकर महिला ने अपनी जान दे दी।
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