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Saturday, January 10, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutMeerut: आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का शीघ्र हो पालन

Meerut: आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का शीघ्र हो पालन

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  • वाल्मीकि आदि आरक्षण वंचित वर्ग संघर्ष समिति ने एक दिवसीय धरने पर उठाई मांग।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। वाल्मीकि आदि आरक्षण वंचित वर्ग संघर्ष समिति ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण में किये गये उप वर्गीकरण के आधार पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति की उपजातियों को आरक्षण का लाभ देने के आदेश का शीघ्र अनुपालन करने की मांग की।

 

 

वाल्मीकि आदि आरक्षण वंचित वर्ग संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक विनोद कुमार बेचैन के द्वारा कमिश्नरी पार्क मेरठ में एक दिवसीय सांकेतिक धरना देने के अवसर पर कही। विनोद कुमार बेचैन ने उपस्थित आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जब उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए देश के अन्य राज्यों ने आरक्षण में उपवर्गीकरण का लाभ उप जातियों को दे दिया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में सकारात्मक कदम क्यों नहीं उठा रही।

उन्होंने मांग उठाते हुए कहा कि तत्काल ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को उच्चतम न्यायालय का आदेश का संज्ञान लेते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को आरक्षण लाभ दिया जाना चाहिए।
पूर्व मंत्री प्रभु दयाल वाल्मीकि ने भी पुरजोर मांग करते हुए कहा कि जब तक वाल्मीकि, महार, धानुक, खटीक एवं अन्य उप जातियों को आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिलेगा, तब तक उक्त जातियों का विकास संभव नहीं हो पाएगा। इसीलिए सरकार को तत्काल ही उप वर्गीकरण के मामले में निर्णय लेना चाहिए।

संघर्ष समिति के वरिष्ठ सदस्य मोनिन्दर सूद वाल्मीकि ने कहा कि बाबा साहब ने जो अधिकार संविधान के माध्यम से हमें दिए हैं, वो हमें मिलने चाहिए तभी हमारे समाज का सर्वांगीण विकास हो पाएगा। सहसंयोजक सुरेंद्र कुमार ढींगिया ने कहा कि यह संघर्ष तब तक नहीं रुकेगा, जब तक की उप वर्गीकरण का लाभ सभी उपजातियां को नहीं मिल जाता।

महामंत्री शालिनी सिंह मसीह ने कहा कि आपके संगठन के बल पर ही संघर्ष समिति इस आंदोलन को अंतिम छोर तक ले जाएगी। इसीलिए सभी को संगठित होकर यह आंदोलन चलाना है। धरने की अध्यक्षता संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र कुमार वैद के द्वारा की गई तथा संचालन मुख्य महामंत्री विनेश कुमार विद्यार्थी के द्वारा किया गया।

वाल्मीकि नेता रमेश गेहरा, विनेश मनोठिया, कैलाश चन्दौला, अजय सिंह महरोलिया, राजेश कुमार बौद्ध, मुकुल गहलोत, लोकेश टंडन, दिनेश चौहान, राजू पेंटर, अजय महेंद्र सिंह, पदमा जॉनसन आदि ने विचार व्यक्त किए।

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