चंडीगढ़। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का मामला एक बार फिर ज्वलंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने वाले किसानों को गिरफ्तार करने का राज्य सरकारों को कड़ा संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख से प्रदेश सरकार मुश्किल में नजर आ रही है और किसानों की गिरफ्तारी करने से विरोध का डर भी सता रहा है।
पिछले वर्ष भी राज्य में पराली जलाने के दस हजार से अधिक मामले सामने आए थे। लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक का जुमार्ना किया गया था। इसमें से सवा करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने वाले किसानों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पंजाब में भले ही किसी पार्टी की सरकार हो, लेकिन वह किसानों की गिरफ्तारी से कन्नी काटती है। राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने के बाद से इस स्थिति में और अधिक वृद्धि हुई जिसका मुख्य कारण यह रहा कि सरकार किसानों से सीधे टकराव नहीं चाहती है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि पंजाब में 32 से अधिक किसान संगठन हैं।
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लगभग एक वर्ष चले किसान आंदोलन के बाद से इन संगठनों को सामाजिक समर्थन भी मिला। इन संगठनों को राजनीतिक समर्थन भी मिलता रहा है। ऐसे में यदि सरकार पराली जलाने वाले किसानों को गिरफ्तार करती है तो किसान संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।


