नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से तुरंत दखल देने की मांग की है। आयोग ने कोर्ट से कहा है कि एसआईआर का काम कर रहे अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों के एक सिस्टमैटिक पैटर्न को रोका जा सके।

आयोग ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के भाषणों से ऐसी स्थितियों को बढ़ावा मिला, जबकि पुलिस दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। ईसी ने अपने हलफनामे में कहा यह साफ तौर पर दिखाता है कि पश्चिम बंगाल में आने वाली चुनौतियां एसआईआर प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये राज्य मशीनरी की कमियों और वहां मौजूद राजनीतिक दखल के माहौल का सीधा नतीजा हैं।
हलफनामे में कहा गया यह विचित्र और चिंताजनक गड़बड़ी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के तुरंत दखल की मांग करती है। ईसी ने लगातार कई ऐसे सार्वजनिक भाषण दिए हैं जो स्वाभाविक रूप से भड़काऊ हैं, जिससे चुनाव अधिकारियों के बीच डर का माहौल बन रहा है। ईसी ने दावा किया कि 14 जनवरी को सीएम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डर फैलाने की कोशिश की एसआईआर प्रक्रिया के बारे में गुमराह करने वाली और गलत जानकारी फैलाई, खुले तौर पर चुनाव अधिकारियों को धमकी दी और निशाना बनाया और मतदाताओं के बीच डर पैदा करने की कोशिश की।
चुनाव आयोग ने कहा साफ तौर पर एक माइक्रो-आॅब्जर्वर हरि दास को निशाना बनाया। इससे एक चुनावी अधिकारी को सार्वजनिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया और उस पर बेवजह दबाव और धमकी दी गई। इससे चुनावी अधिकारियों की आजादी, निष्पक्षता और सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में पड़ गई।
नतीजतन, मुर्शिदाबाद निर्वाचन क्षेत्र के नौ माइक्रो-आॅब्जर्वर ने मिलकर पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर बदमाशों की ओर से किए गए हिंसक हमलों और सुरक्षा के अपर्याप्त इंतजामों के कारण एसआईआर प्रक्रिया से औपचारिक रूप से अपना नाम वापस ले लिया। आयोग ने कहा, 15 जनवरी को उत्तर दिनाजपुर जिले में जहां एसआईआर का काम चल रहा था उस जगह पर 700 लोगों की भीड़ ने हमला किया।

