तहसीलदार पर मिलीभगत और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया
शारदा रिपोर्टर मेरठ। बिल्वेश्वरनाथ मंदिर परिसर स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े राजेंद्र वर्मा और पवन गोयल ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद मंदिर की कुर्की निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई। उन्होंने सदर तहसीलदार रवि प्रजापति पर मिलीभगत और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकतार्ओं के अनुसार, मंदिर पर कब्जेदारी को लेकर समिति और पुजारी पक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। मामला फिलहाल अपर नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन था। थाना सदर बाजार की रिपोर्ट में भी किसी भी पक्ष का स्पष्ट कब्जा सिद्ध नहीं हुआ था। इसके बाद अदालत ने 17 मार्च 2026 को मंदिर को कुर्क करने का आदेश दिया था, जिसकी जिम्मेदारी तहसीलदार और थाना सदर बाजार को दी गई थी।
राजेंद्र वर्मा और पवन गोयल ने आरोप लगाया कि तीन दिन में पूरी होने वाली यह कार्रवाई दो महीने से अधिक समय तक लटकी रही। जब 24 मई को कुर्की की गई, तब भी पक्षकारों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि तहसीलदार ने पुजारी पक्ष से मिलीभगत कर उनके बताए व्यक्ति को अस्थायी पुजारी नियुक्त कर दिया।
शिकायतकतार्ओं ने यह भी आरोप लगाया कि तहसीलदार ने मंदिर परिसर को पूरी तरह प्रशासनिक कब्जे में नहीं लिया। स्थानीय राजनीतिक दबाव के चलते पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि समिति और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी गई और उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।
जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन कराया जाए। इसमें मंदिर परिसर से पुजारियों के बैनर-पोस्टर हटाने, कमरों को प्रशासनिक नियंत्रण में लेने, सीसीटीवी का नियंत्रण प्रशासन को सौंपने और एक स्वतंत्र पुजारी नियुक्त करने की मांग शामिल है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।