नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और ईज आॅफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर मंजूरी देने और देरी की स्थिति में डीम्ड क्लीयरेंस का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रक्रियाओं में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जा सके।
सरकार ने साफ किया है कि वह भारत को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ये नया आदेश उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे निवेश, इनोवेशन और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा।

नई व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुल्क और प्रक्रियाओं को मानकीकृत किया गया है, ताकि कंपनियों के लिए अनुमान लगाना और योजना बनाना आसान हो सके। इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है।
सरकार ने अधिकृत संस्थाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में गैस पाइपलाइन बिछाने और उनके विस्तार के लिए बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। सरकार का दावा है कि यह कदम देशभर में गैस नेटवर्क के विस्तार को गति देगा।
नए नियमों के तहत पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के लिए सभी जरूरी अनुमतियों के लिए एक तय समयसीमा रखी गई है। इसका मतलब यह है कि अब कंपनियों को महीनों तक मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अगर तय समय के भीतर अनुमति नहीं दी जाती है, तो उसे स्वत: स्वीकृति यानी डिम्ड अप्रूवल माना जाएगा, जिससे प्रोजेक्ट्स के अटकने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।


