Homeउत्तर प्रदेशMeerutनौचंदी मेले में गंदगी का अंबार, लोग हुए परेशान

नौचंदी मेले में गंदगी का अंबार, लोग हुए परेशान

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  • स्वच्छ भारत अभियान के संदेश का मजाक बना रहे कूड़े के ढेर और कीचड।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। तकरीबन एक महीने तक चलने वाले नौचंदी मेले में यूं तो अव्यवस्थाओं का दौर लगातार जारी रहा। लेकिन मेला खत्म होने के बाद भी यहां अव्यवस्थाओं का दौर जारी है। अब यहां गंदगी और कूड़े के ढेर लोगों को परेशान करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, नगर निगम अधिकारियों ने कहा था कि मेला समाप्त होने के तुरंत बाद सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी और कहीं भी कूड़ा और गंदी नहीं दिखाई देगी। लेकिन, मेला परिसर और उसके आसपास लगे कूड़े और गंदगी के ढेर नगर निगम के अधिकारियों के दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।

बता दें की 26 जून से मेरठ में लगने वाले प्रांतीय मेले की शुरूआत कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे, डीएम दीपक मीणा और अन्य पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गणमान्य लोगों ने माता नौचंदी के मंदिर में हवन पूजन कर और चुनरी चढ़कर की गई थी। जिसके बाद बाले मियां की मजार पर चादर चढ़ाई गई और मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया। हालांकि, इस दौरान नौचंदी सुचारू रूप से चलती रही। जबकि पटेल मंडप में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे।

लेकिन, इस दौरान पटेल मंडप में हुई रागनी कार्यक्रम में अश्लीलता परोसने और मेला परिसर में मारपीट की वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यवाही के निर्देश दिए और रागिनी कार्यक्रम को बंद करवरकर आयोजकों से इस तरह के कार्यक्रम होने पर जवाब मांगे। वहीं, एक कपल के किस करने के सीन पर भी काफी बवाल हुआ। जो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हुआ। जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की बात कही।

लेकिन इन सब के बाद अब नौचंदी मेला कूड़े के देर में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। जगह-जगह गंदगी और कूड़े के ढेर लगे हैं और इस बारिश के मौसम में यह गंदगी बीमारियों को बढ़ावा देती भी नजर आ रही है।

हालांकि, एक तरफ स्वास्थ्य विभाग दस्तक अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करतने की बात कह रहा है कि कहीं भी पानी एकत्र न होने दे और गंदगी ना फैलाएं ताकि बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके। लेकिन, नौचंदी मेले में पड़ी गंदगी और कूड़े के ढेर यह बता रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की यह बातें सिर्फ कागजों में ही चलाई जाती है जबकि हकीकत में इनका कुछ लेना-देना नहीं।

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