Homeशहर और राज्यउत्तर प्रदेशकानपुर फर्जी डिग्री केस में पकड़ा गया एक बिचौलिया 

कानपुर फर्जी डिग्री केस में पकड़ा गया एक बिचौलिया 

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– कई यूनिवर्सिटी में कर चुका है काम, 3 राज्यों को रवाना हुई एसआईटी की टीमें।

कानपुर। 9 राज्यों के 14 यूनिवर्सिटियों की फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार करने के मामले में एसआईटी को एक बड़ी बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े एक बिचौलिए को नोएडा से हिरासत में लिया है। वीके नाम से चर्चित यह बिचौलिया देश की कई यूनिवर्सिटियों के लिए मार्केटिंग का काम करता था और गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र ओझा के संपर्क में रहकर डिग्रियां उपलब्ध कराने का काम करता था।

 

कानपुर

 

पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये वसूलता था। इसके बाद गिरोह के सरगना शैलेंद्र ओझा की मदद से फर्जी तरीके से डिग्री और मार्कशीट तैयार कराकर उन्हें थमा देता था। मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

18 फरवरी को किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था। वहां से पुलिस ने 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड की 900 से अधिक मार्कशीट और डिग्री बरामद की थीं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी समेत कई पाठ्यक्रमों की डिग्रियां शामिल थीं। मौके से पुलिस ने चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि यह गिरोह वर्ष 2012 से फर्जी डिग्री, माइग्रेशन और अंकपत्र तैयार करने का धंधा चला रहा था।

पुलिस जांच में गिरोह का मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा निकला। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच के दौरान पुलिस को शैलेंद्र के बैंक खातों में पिछले चार वर्षों में करीब 5 करोड़ रुपये के लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं।

मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब संबंधित यूनिवर्सिटियों से संपर्क कर बरामद डिग्री और मार्कशीट का सत्यापन शुरू कर दिया है। सोमवार को एसआईटी की टीमें सिक्किम, झारखंड और उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के लिए रवाना हुई हैं। टीमें वहां संबंधित विश्वविद्यालयों में दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ बाबुओं और पूर्व कर्मचारियों से भी पूछताछ करेंगी।

एसआईटी प्रभारी योगेश कुमार के मुताबिक शैलेंद्र के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच के दौरान इस बिचौलिये का सुराग मिला था। हिरासत में लिए गए आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह नोएडा, जयपुर और हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग का काम कर चुका है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और मामले में फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

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