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Meerut: विभिन्न मांगों को लेकर मजदूर संघर्ष संगठन ने मंडलायुक्त कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन

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  • जी रामजी कानून से श्रमिकों के हितों पर होगा आघात।
  • विभिन्न मांगों को लेकर मजदूर संघर्ष संगठन ने मंडलायुक्त कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। चार श्रम संहिताओं, राष्ट्रीय श्रमशक्ति नीति, 2025 और वीबी-जीआरएएम (जी) कानून के पुनर्विचार और निरस्त्रीकरण के मामले को लेकर गुरुवार को मजदूर संघर्ष संगठन के दर्जनों सदस्यों ने प्रदर्शन किया।

 

 

देश के विभिन्न मजदूर संगठनों, यूनियनों, श्रमिक समुदायों और सामाजिक संगठनों की ओर से, हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं, राष्ट्रीय श्रमशक्ति नीति, 2025 और वीबी-जीआरएएम (जी) कानून से उत्पन्न गंभीर श्रमिक-हित हनन की नई श्रम संहिताएं रोजगार में ‘हायर एंड फायर’ मॉडल को बढ़ावा देती हैं, ठेका प्रथा और प्रशिक्षु व्यवस्था को स्थायी रोजगार के रूप में सामान्य करती हैं। मजदूरों से यूनियन बनाने का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति, नौकरी-वेतन की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मौलिक अधिकारों को छीनती हैं।

इन श्रम संहिताओं में 300 से कम कर्मियों वाली संस्थाओं को छंटनी के लिए सरकारी अनुमति से छूट देकर देश के लगभग 90 प्रतिशत मजदूरों को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। यह संहिताएं कार्य-घंटों, अवकाश, ओवरटाइम और कार्य-शर्तों पर नियोक्ता केंद्रित अधिकार स्थापित करती हैं। जबकि, दूसरी ओर मनरेगा को कमजोर कर वीबी-जीआरएएम (जी) कानून लागू किया गया है। यह कानून देश के 30 करोड़ ग्रामीण मेहनतकशों के अधिकार पर गहरा आघात है।

यह कानून काम के अधिकार को सार्वभौमिक नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं और चयनित सूचियों पर निर्भर बनाता है। ग्राम सभा और पंचायत की संवैधानिक भूमिका समाप्त कर एक केंद्रीकृत, तकनीकी और निगरानी-आधारित ढांचा खड़ा किया गया है। पहले 10 प्रतिशत की अपेक्षा अब राज्यों को 40 प्रतिशत योजना के व्यय का वहन करना होगा। जिसके चलते पहले मिलने वाला रोजगार सीमित हो जाएगा।

इस कानून में अग्रिम अधिसूचना के जरिए खेती के मौसम में लगातार 60 दिन काम देने पर रोक लगाई गई है, जिससे काम के इच्छुक ग्रामीण मजदूरों को जबरन रोजगार से वंचित किया जाएगा। इसका सबसे गंभीर असर महिला मजदूरों पर पड़ेगा। कानून में कार्यस्थल पर पीने का पानी, तंबू, बच्चों की देखभाल, प्राथमिक चिकित्सा और औजार जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी कोई प्रावधान नहीं है।

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