भारतीय इंजीनियरों व साफ्टवेयर डेवलपर्स की जिंदगी में तूफान
नई दिल्ली। अमेरिका के टेक सेक्टर में आई छंटनी की नई लहर ने वहां रह रहे हजारों भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी है। जो लोग सालों से अमेरिका में काम कर रहे थे, घर खरीद चुके थे और अपने परिवार के साथ बस चुके थे, उनके लिए कंपनी से आया सिर्फ एक ईमेल सब कुछ बदल रहा है।
मेटा, अमेजन और लिंक्डइन जैसी दिग्गज कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आॅटोमेशन के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म हो रही हैं। भारतीय पेशेवरों के लिए नौकरी जाने का मतलब सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि देश छोड़ने का काउंटडाउन शुरू होना है। अमेरिका में काम करने वाले अधिकांश भारतीय टेक पेशेवर एच-1 वीजा पर हैं, जो सीधे उनकी कंपनी से जुड़ा होता है। नौकरी जाने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की होती है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के तहत, उन्हें वीजा ट्रांसफर करने के लिए किसी अन्य कंपनी में ढूंढने के लिए बहुत कम समय मिलता है।
डेटा साइट के अनुसार, इस साल अब तक टेक इंडस्ट्री में 1,10,000 से अधिक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा विदेशी कर्मचारियों, विशेषकर भारतीयों का है, जो एच वन वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025 के अमेरिकी सरकारी आंकड़ों से भी पता चलता है कि स्वीकृत एच-1 याचिकाओं में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक थी।
मेटा जैसी कंपनियां छंटनी के बदले 16 सप्ताह का मूल वेतन और हर साल की सेवा के बदले दो अतिरिक्त सप्ताह का वेतन दे रही हैं, साथ ही 18 महीने का हेल्थकेयर कवरेज भी दे रही हैं। लेकिन वित्तीय मदद के बावजूद, वीजा की अनिश्चितता का मानसिक और भावनात्मक तनाव झेलना बहुत मुश्किल हो रहा है। यह छंटनी ऐसे समय में हो रही है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी टेक इंडस्ट्री के हायरिंग पैटर्न को बदल रहा है। कंपनियां पारंपरिक इंजीनियरिंग और सपोर्ट रोल को कम करके संसाधनों को एआई और आॅटोमेशन की तरफ मोड़ रही हैं।
अकेले मेटा इस साल एआई-संबंधित निवेशों पर $100 बिलियन से अधिक खर्च कर सकती है। कर्मचारियों के बीच अब यह डर बैठ गया है कि यह मंदी अस्थायी नहीं है, बल्कि तकनीक में आ रहे इस बदलाव के कारण रूटीन कोडिंग और सामान्य सॉफ्टवेयर भूमिकाओं के लिए नौकरियां हमेशा के लिए कम हो सकती हैं।