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मेरठ में आवास विकास की नाक के नीचे न केवल अवैध निर्माण हुआ, सरकारी जमीन पर भी कर लिया कब्जा

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– आवास विकास की दीवार तोड़ कर अवैध कब्जा कर लिया

– चाणक्यपुरी में व्यवसायिक कांप्लैक्स निर्माण में सर्विस रोड और नाले पर किया अतिक्रमण।


शारदा रिपोर्टर मेरठ। आवास एवं विकास परिषद की नाक के नीचे न केवल अवैध निर्माण हुआ, बल्कि सरकारी जमीन पर भी कब्जा हो गया। अहम बात ये है कि बार-बार की शिकायत के बाद भी आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे रहे। अब चाणक्यपुरी रेजिडेंट्स वैलफेयर सोसाइटी के लोग इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

 

 

चाणक्यपुरी वैलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष नीरज त्यागी और सचिव अनुज माहेश्वरी ने बताया कि चाणक्यपुरी कॉलोनी के बाहर कुटी चौराहे से जागृति विहार विस्तार योजना तक जाने वाले 36 मीटर चौड़ा मार्ग है। इस मार्ग पर नाला और सर्विस लेन निर्माण के लिए आवास एवं विकास परिषद ने चाणक्यपुरी कॉलोनी की दीवार से सटाकर दीवार का निर्माण कराया था।

लेकिन इस दीवार पर अतिक्रमण करते हुए एक महिला ने अवैध रूप से दो मंजिला व्यवसायिक निर्माण करा दिया। इसके साथ ही सर्विस रोड और सरकारी नाले पर भी अतिक्रमण कर लिया है। इस मामले की शिकायत सोसायटी द्वारा लगातार कई महीनों से आवास एवं विकास परिषद में की जा रही है। लेकिन आवास विकास के अभियंताओं की सांठगांठ से निर्माण रुकना या सील लगना तो दूर पूरा हो चुका है। यही नहीं अभी भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 

 

आरटीआई का भी नहीं दे रहे जवाब: नीरज त्यागी ने आरोप लगाया कि सितंबर माह में उनके द्वारा दीवार निर्माण, सर्विस रोड, नाला निर्माण और बनाए गए अवैध कांप्लैक्स से संबंधित सूचनाएं आवास विकास से मांगी थी। लेकिन अभी तक भी सूचना नहीं दी गई है। सूचना में बस दीवार निर्माण की अधूरी सूचना दी गई है, जिसमें सिर्फ दीवार निर्माण करने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी का नाम बताया गया है। लेकिन बाकी की सूचना बार-बार मांगने के बाद भी नहीं दी जा रही है।

 

 

 

एमडीए को भी लिखा पत्र: चाणक्यपुरी सोसायटी द्वारा एमडीए वीसी को भी पत्र लिखा गया है। जिसमें अवैध रुप से बनाए गए व्यवसायिक निर्माण की नक्शा स्वीकृति से संबंधित जानकारी मांगी गई है। वहीं यह भी बताया गया कि मानचित्र संख्या 3/2000 के अनुसार व्यवसायिक भूखंड चाणक्यपुरी की बाउंड्री के बाद है। लेकिन यह निर्माण बाउंड्री से सटाकर कर दिया गया है। जो कि पूरी तरह अवैध है।

 

 

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