शारदा रिपोर्टर मेरठ। नौतपा शुरू होने से पहले ही भीषण गर्मी ने लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सुबह के नौ बजते ही सड़कें सूनी दिखाई देने लगती हैं, जबकि दोपहर होते-होते तपती लू लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर रही है। मई के तीसरे सप्ताह में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आज तापमान 44 डिग्री पार करने का अनुमान है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिर्फ सामान्य मौसमी बदलाव नहीं बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन, अल नीनो और तेजी से बढ़ते शहरीकरण का संयुक्त असर है। आईसीएआर-आईआईएफआर मोदीपुरम के वरिष्ठ कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद शमीम ने बताया कि वर्तमान में वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह शुष्क हैं और आकाश में बादलों की भारी कमी बनी हुई है। मानसून गतिविधियों में देरी के कारण सूर्य की किरणें सीधे धरातल तक पहुंच रही हैं, जिससे तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
डॉ. शमीम के मुताबिक तेजी से बढ़ती कंक्रीट की इमारतें, चौड़ी सड़कें और हरित क्षेत्रों में कमी ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ा रही हैं। दिनभर इमारतें और सड़कें गर्मी सोखती हैं और रात में उसे वातावरण में छोड़ देती हैं। यही कारण है कि अब देर रात और तड़के भी लोगों को गर्म हवाओं से राहत नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो परिस्थितियों के कारण बादलों का निर्माण कमजोर हो गया है और सामान्य से कम वर्षा हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लू और भीषण गर्मी के रूप में दिखाई दे रहा है। गर्मी का असर अब कृषि क्षेत्र पर भी साफ नजर आने लगा है।

