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गैस की तेज सप्लाई के लिए सरकार का बड़ा फैसला

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– 47 हजार मीट्रिक टन गैस लेकर टैंकर पहुंच रहा।

नई दिल्ली। देश में एलपीजी गैस की सप्लाई तेज करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 47 हजार मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आ रहे पाइन गैस टैंकर का रूट बदल दिया गया है। यह 227 मीटर लंबा रेफ्रिजरेटेड एलपीजी शिप फारस की खाड़ी से आया है। मूल रूप से यह न्यू मंगलौर और फिर ओडिशा के धामरा पोर्ट जाने वाला था। अब रूट बदलकर इसे विशाखापत्तनम भेज दिया गया है। कार्गो को जल्दी उतारने और तेज डिलीवरी के लिए यह फैसला लिया गया है। पूर्वी तट के रूट से समय बच रहा है।

 

गैस की तेज सप्लाई के लिए सरकार का बड़ा फैसला

 

वाइजैग पोर्ट अथॉरिटी के प्रवक्ता के अनुसार गुरुवार को ही यह पोर्ट वाइजैग पहुंच जाएगा। यह टैंकर मार्च के महीने में जग वसंत के साथ स्ट्रेट आॅफ हॉर्मुज से गुजरा था। जग वसंत पहले ही गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंच चुका है। पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी वजह से एलपीजी टैंकरों को प्राथमिकता दी जा रही है।

यह टैंकर जग वसंत के साथ ही यूएई के घनतूत से रवाना हुआ था। ईरान ने भारतीय टैंकरों को खासतौर पर हॉर्मुज से निकलने के लिए विशेष अनुमति दी थी। जग वसंत पहले ही गुजरात के वाडीनार पोर्ट पहुंच चुका है। यह टैंकर भी 28 मार्च को वडीनार टर्मिनल पहुंच गया था, लेकिन यह देश के पूर्वी तट तक पहुंचने के लिए देश के दक्षिणी सीमा के पार से चक्कर लगाते हुए बंगाल की खाड़ी में पहुंचा है। उत्तर में धामरा तक पहुंचने में और ज्यादा समय लगता। इसी को कम करने के लिए इसे वाइजैग में खाली किया जाएगा। यहां से एलपीजी को जमीनी रास्ते से देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाएगा।

एलपीजी की आपूर्ति में बाधा आने के बाद भारत सरकार नए पीएनजी कनेक्शन जोड़ रही है। भारत ने मार्च महीने में पाइप के जरिये आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) के 3.1 लाख से अधिक नए कनेक्शन के लिए गैस की आपूर्ति शुरू की दी है, जबकि जबकि 2.7 लाख अन्य नए कनेक्शन जोड़े हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान में बताया कि मार्च के दौरान घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, छात्रावासों और कैंटीन सहित 3.1 लाख से अधिक कनेक्शन के लिए गैस की आपूर्ति शुरू की गई है। इसका आशय है उन पाइपलाइन में गैस की आपूर्ति शुरू कर दी गई जहां पहले से कनेक्शन मौजूद थे। इसके अलावा, इसी महीने 2.7 लाख नए आवेदन स्वीकार कर कनेक्शन दिए गए हैं। फरवरी के अंत तक भारत में 1.64 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन थे।

सरकार ने अब इस विस्तार अभियान को जून के अंत तक बढ़ा दिया है और शहरी गैस वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे छात्रावासों और सामुदायिक रसोई जैसे स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन दें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में घरों और सीएनजी को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि औद्योगिक इकाइयों को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा दिया जा रहा है।

 

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