HomeWorld Newsईरान पर हमले में पहली बार इस्तेमाल हुआ 'फिदायीन' ड्रोन

ईरान पर हमले में पहली बार इस्तेमाल हुआ ‘फिदायीन’ ड्रोन

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नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान पर हमले के दौरान अपनी ड्रोन वॉरफेयर क्षमता का नया रूप दिखाया है। अमेरिका ने ईरान की ड्रोन स्ट्रैटेजी को उसके ही खिलाफ मोड़ दिया।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका ने ईरान पर स्ट्राइक के दौरान पहली बार अपने नए कम लागत वाले ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ LUCAS (लो-कॉस्ट अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम) को तैनात किया।

ईरान पर किए गए को-ऑर्डिनेटेड स्ट्राइक में ईरान के जरूरी मिलिट्री एसेट्स को टारगेट किया गया। इसके नतीजे में तेहरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।

इस ऑपरेशन में US और इजराइली सेनाओं ने एडवांस्ड और सस्ते हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसमें नेक्स्ट-जेनरेशन फाइटर जेट और लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों के साथ कम कीमत वाले ऑटोनॉमस ड्रोन शामिल थे। इससे स्केल और स्ट्रैटेजी दोनों में तेजी से बढ़ोतरी हुई।

नए तैनात किए गए LUCAS ड्रोन के साथ, मिशन में टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें और एडवांस्ड फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल थे, जिसमें F/A-18 और F-35 जेट शामिल थे।

US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बाद में ऑपरेशन में शामिल टॉमहॉक मिसाइलों और फाइटर एयरक्राफ्ट की तस्वीरें जारी कीं।

LUCAS ड्रोन का पहला कॉम्बैट इस्तेमाल

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के हिस्से के तौर पर US मिलिट्री ने लो-कॉस्ट अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम (LUCAS) को मैदान में उतारा, जो ईरान के शाहेद-136 प्लेटफॉर्म से रिवर्स-इंजीनियर किया गया एक वन-वे “कामिकेज़” ड्रोन है।

पेंटागन के अनुसार, हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन फीनिक्स, एरिजोना की कंपनी स्पेक्ट्रेवर्क्स के बनाए LUCAS सिस्टम जैसे ही दिखते हैं। कम कीमत वाले LUCAS कई मैन्युफैक्चरर्स द्वारा बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए है।

हर यूनिट की कीमत लगभग $35,000 है, जो इसे कई पारंपरिक सटीक हथियारों से काफी सस्ता बनाती है। ऐसे ड्रोन पर बढ़ती निर्भरता एक बड़े मिलिट्री बदलाव को दिखाती है, जिसे अधिकारी “किफायती मास” कहते हैं।

जिसमें दुश्मनों पर काबू पाने के लिए बड़ी संख्या में सस्ते हथियारों को तैनात किया जाता है। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद इस स्ट्रैटेजी को खास पहचान मिली, जिसने ड्रोन की युद्ध के मैदान में प्रभावशीलता को हाईलाइट किया।

LUCAS को एक मॉड्यूलर, ओपन-आर्किटेक्चर सिस्टम के साथ डिजाइन किया गया है, जो इसे कई मिशन प्रोफाइल करने में मदद करता है। इसमें स्ट्राइक ऑपरेशन, टोही और कम्युनिकेशन सपोर्ट शामिल हैं। इसका फ्लेक्सिबल कॉन्फ़िगरेशन ऑपरेटर्स को ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से पेलोड को तेजी से बदलने की सुविधा देता है।

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