कचहरी में खुलासा होने पर आरोपी से हुई पीड़ित की हाथापाई
शारदा रिपोर्टर मेरठ। सदर तहसील में भूमि संबंधी एक बड़े फजीर्वाड़े का खुलासा हुआ है। यहां लगभग 20 वर्ष पहले मृत हो चुके दो व्यक्तियों की 380 वर्ग मीटर जमीन को कागजों में जीवित दिखाकर बेच दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में भी खरीदार के नाम दर्ज हो गई थी।
इस फजीर्वाड़े का पता चलने पर पीड़ित पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई। बुधवार को कचहरी परिसर में इस मामले को लेकर हंगामा हो गया। अधिवक्ताओं ने फजीर्वाड़ा करने वाले आरोपी को पकड़ लिया और उसके साथ हाथापाई हुई।
यह पूरा मामला परतापुर थानाक्षेत्र के काजमाबाद गून गांव का है। गांव निवासी ओमप्रकाश और सुंदर की मृत्यु करीब 20 वर्ष पूर्व हो चुकी थी। आरोप है कि गांव के ही सुरेंद्र सिंह ने इन दोनों मृतकों के स्थान पर अन्य अज्ञात व्यक्तियों (फर्जी गवाह और डमी मालिक) को उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किया।
इसके बाद, दिसंबर माह में उनकी 380 वर्ग मीटर भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) अपने पक्ष में करा लिया गया। इस घपलेबाजी का चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि बैनामे के बाद संबंधित भूमि का दाखिल खारिज (नामांतरण) भी हो गया।
अप्रैल माह में राजस्व अभिलेखों में सुरेंद्र सिंह का नाम भी दर्ज कर लिया गया। नामांतरण की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दस्तावेजों की प्रारंभिक पड़ताल तक नहीं की गई, जिससे इतनी बड़ी अनियमितता को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
मामले की जानकारी संबंधित पक्षों और कचहरी में मौजूद अधिवक्ताओं को लगी तो माहौल गरमा गया। वकीलों ने रजिस्ट्री दफ्तर के पास ही आरोपी सुरेंद्र सिंह को घेर लिया, जिसके बाद दोनों पक्षों में हाथापाई हुई। फिलहाल, इस फर्जी बैनामे को निरस्त करने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है।