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Sunday, January 11, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ: स्ट्रीट डांग और बंदरों से मुक्ति दिलाने की मांग

मेरठ: स्ट्रीट डांग और बंदरों से मुक्ति दिलाने की मांग

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– शिवसेना कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए डीएम को सौंपा ज्ञापन।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। इंसान की जान के दुश्मन बनकर सड़कों पर धूम रहे आवारा कुत्ते और बंदरों से निजात दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे मेरठ इकाई के दर्जनों सदस्यों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।

इस दौरान उन्होंने एक ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बताया कि, भ्रष्ट नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के नक्कारेपन के कारण मेरठ की जनता सड़कों पर चल रहें आवारा आतंक से खौफजदा हैं। सड़कों पर इन गौवंश के कारण दुर्घटनाएं हो रहीं हैं तो कहीं आवारा कुत्ते और बन्दर आम जन को काट कर घायल कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि, जहां एक तरफ गौवंश पालक दुधारू गायों का दुध निकाल कर खुली सड़कों पर विचरण करने को छोड़ देते है, और नगर निगम अधिकारी और कर्मचारी इन गौवंश पालकों पर कड़ी कार्रवाई ना करके गौवंश पालकों से अवैध पैसा वसूली करके गौवंश को सड़कों पर खुला विचरण करने देते हैं, इसी तरह से बेसहारा गौवंश के सड़कों पर विचरण करने से जहां सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं तो वहीं, इन गौवंश के घायल होने का खतरा हर वक्त बना रहता है।

इसी तरह से आवारा कुत्तों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पश्चात भी आवारा कुत्तों के संदर्भ में नगर निगम द्वारा अभी तक भी कोई कार्ययोजना ना बनाएं जाने के कारण प्रति दिन कोई ना कोई नागरिक इन कुत्तों के काटे जाने से घायल होता रहता है, या फिर रैबीज हो जाने के कारण
उसकी मृत्यु हो जाती है। जबकि, इसी तरह से नगर निगम द्वारा बंदरों को पकड़ने की कोई भी कार्ययोजना ना बनाएं जाने के कारण शहर वासियों के अधिकांश घर एक पिंजड़े में तब्दील होते जा रहे हैं, लेकिन उसके पश्चात भी बंदरों के हमलों से आम नागरिक प्रतिदिन घायल हो रहें हैं।

इन सब बढ़ती घटनाओं के कारण आम जनमानस में नगर निगम के खिलाफ तीव्र आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है, जो कभी भी कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए शिवसेना यह मांग करती है कि, गौवंश को खुली सड़कों पर छोड़ने वाले ऐसे गौवंश पालकों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करते हुऐ बेसहारा गौवंश को गौशाला में संरक्षित किया जाए। साथ ही आवारा कुत्तों जिन पर शीघ्र सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कराते है बंदरों की नसबंदी कराकर उन्हें दूर जंगलों में छोड़ने की व्यवस्था कराई जाए। ताकि, आम जनमानस को लगातार हो रही परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

 

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