Tuesday, April 22, 2025
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चुनावी गणित: नहीं निकले मतदाता, कौन हारेगा और कौन बनेगा विजेता

  •  लोकसभा चुनाव 2019 की तुलना में इस करीब छह प्रतिशत कम हुआ मतदान
  •  मतदान का ग्राफ गिरने से रामपुर को छोड़ बाकी सीटों पर भाजपा में बेचैनी।

अनुज मित्तल, समाचार संपादक

मेरठ। लोकसभा चुनाव 2024 के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में आठ लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। लेकिन वोटिंग के ट्रेंड और कम मतदान ने सभी को उलझा दिया है। हालांकि बढ़ा हुआ मतदान हमेशा ही भाजपा के मुफीद रहा है और कम मतदान उसके लिए परेशानी का कारण बना है। इस बार कम हुआ मतदान भी भाजपा के भीतर बेचैनी पैदा कर रहा है।

शुक्रवार को सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत, नगीना, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और कैरान लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। इनमें सबसे ज्यादा पीलीभीत और सबसे कम मतदान बिजनौर लोकसभा सीट पर हुआ है। जबकि पिछले चुनाव की तुलना में प्रथम चरण की सबसे ज्यादा हॉट सीट मुजफ्फरनगर का मतदान प्रतिशत सबसे ज्यादा गिरा है।

पिछले तमाम चुनावी आंकड़ों को देखा जाए तो 2014 में बंपर मतदान हुआ था। उस चुनाव में मोदी लहर जहां चरम पर थी, तो मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सांप्रदायिक धु्रवीकरण भी हावी था। जिसके चलते इस चुनाव में बंपर मतदान हुआ था। लेकिन 2019 आते-आते मोदी लहर में कुछ कमी आयी तो विपक्षी गुट भी एकजुट हो गए। इस चुनाव में सपा, बसपा और रालोद ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, जबकि भाजपा और कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव मैदान में थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में भी औसतन 66.58 प्रतिशत मतदान हुआ था। लेकिन इस बार 2024 के चुनाव में यह आश्चर्यजनक रूप से घटकर 60.59 प्रतिशत रह गया। इस मतदान घटना के पीछे राजनीतिक दल जहां मौसम में गर्मी की बात कह रहे हैं। लेकिन यदि राजनीति के जानकारों की मानें तो इस बार चुनाव सिर्फ रैलियों, नुक्कड़ सभाओं और रोड शो तक ही सिमट गया है। गांवों, कसबों और बाजारों में पोस्टर, बैनर और झंडे लगभग गायब ही हैं। ऐसे में चुनाव का जो माहौल बनता था और लोगों में उत्सुकता बनती थी, वह पूरी तरह गायब होने से मतदाता भी उदासीन हो गया।

मतदाताओं की नाराजगी का भी रहा असर

इस बार मतदाताओं में किसी न किसी मुद्दे को लेकर नाराजगी भी नजर आ रही है। बड़ी बात ये है कि यह नाराजगी भाजपा से सबसे ज्यादा है दिखाई दी। ऐसे में इस नाराजगी के कारण भी मतदान पर असर पड़ा।

भाजपा के लिए है खतरे की घंटी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यदि मतदान के ट्रेंड को देखें तो यहां पर मुस्लिम और दलित मतदाताओं में शुरू से ही मतदान को लेकर ज्यादा उत्साह नजर आता है। मुस्लिम-दलित बहुल इलाकों में मतदान केंद्र पर सुबह से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती हैं। इसके अलावा अति पिछड़ा वर्ग भी मतदान उत्साह से करता है। लेकिन भाजपा का सवर्ण वोट मतदान को लेकर उतना उत्साही नजर नहीं आता है। ऐसे में यह कम मतदान भाजपा की बेचैनी को बढ़ा रहा है।

मतदान बढ़ाने को बनानी होगी रणनीति

यूपी में अभी मात्र आठ सीटों पर ही चुनाव हुआ है। अभी 72 सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में भाजपा को यूपी में अपने पिछले दो चुनावों का परिणाम दोहराने के लिए अब सबसे ज्यादा ध्यान मतदान पर देना होगा। क्योंकि यदि मतदान प्रतिशत बढ़ता है तो निश्चित रूप से भाजपा को आने वाले चरणों में लाभ होगा। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो परिणाम उलट भी आ सकते हैं।

2019 से कम हुआ मतदान ( लगभग प्रतिशत में)

लोकसभा सीट     वर्ष 2024    वर्ष 2019
पीलीभीत             63.39        67.41
मुरादाबाद            60.05       65.46
रामपुर                 55.75      63.19
सहारनपुर            66.65      70.87
कैराना                61.17       67.45
मुजफ्फरनगर       60.02       68.42
बिजनौर               58.21      66.22
नगीना                 59.54      63.66
औसत मतदान      60.59     66.58

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