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Wednesday, February 4, 2026
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Central Market Big news: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से सदमे में सेंट्रल मार्केट के व्यापारी

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– व्यापारियों ने कहा इस उम्र में कौन देगा काम, आवास व विकास परिषद भी तैयारी में जुटा।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को अब चमत्कार का ही सहारा है। सुप्रीम कोर्ट ने यहां के शेष अवैध निमार्णों से जुड़े मामले में 17 दिसंबर, 2024 को कोर्ट की ओर से जारी आदेशों को सही ठहराते हुए ध्वस्तीकरण की संभावनाओं पर मोहर लगा दी है।

 

Central Market traders shocked by Supreme Court's strictness

 

सुप्रीम फरमान के बाद सेंट्रल मार्किट के व्यापारी सदमे में है। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। हालत यह है कि अब वह विरोध का साहस भी नहीं जुटा पा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट से जुड़े मामले की 27 जनवरी, 2026 को सुनवाई करते हुए अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश किए हैं। सोमवार को सुनवाई का आदेश अपलोड हुआ तो व्यापारियों में खलबली मच गई।

पूरे बाजार में मायूसी छा गई। आवास एवं विकास परिषद भी सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद किसी भी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है और जो छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, उसे तैयार करने में जुट गया है। अफसरों का कहना है कि आगे जो भी आदेश होगा, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में भूखंड संख्या 661/6 था। आवास विकास परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार,यह भूखंड वर्ष 1986 में काजीपुर निवासी वीर सिंह को आवंटित किया गया था। 30 अगस्त, 1986 को उन्हें भूखंड का कब्जा सौंपा गया।

इसके बाद 6 अक्टूबर, 1988 को फ्री होल्ड डीड जारी की गई, जिसमें साफ तौर पर उल्लेख था कि यह संपत्ति केवल आवासीय उपयोग के लिए है, लेकिन कुछ ही वर्षों बाद विनोद अरोड़ा ने पावर आॅफ अटॉर्नी के माध्यम से इस संपत्ति का नियंत्रण प्राप्त कर लिया और उस पर 22 व्यावसायिक दुकानें बनवा डालीं। इसके बाद वहां कमर्शियल यूज बढ़ता चला गया।

19 सितंबर, 1990 को आवास विकास परिषद ने इस निर्माण को अवैध घोषित करते हुए नोटिस दिया और तत्काल काम रोकने की हिदायत दी। इसके बावजूद ना तो निर्माण रूका और ना ही भू उपयोग ही बदला। 9 फरवरी, 2004 को परिषद ने निर्माण अधिनियम की धारा-83 के तहत आदेश दिया कि अवैध निर्माण रोकें नहीं तो ध्वस्त करें। 23 मार्च, 2005 को आवास एवं विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिए जो कागजों तक सिमटे रहे। 17 दिसंबर, 2024 को लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने 661/6 भूखंड के साथ ही ऐसे सभी निमार्णों को ध्वस्त करने के आदेश पारित कर दिए।

कोर्ट के आदेश पर भी जब अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई तो आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दायर की। इसके बाद 25 अक्टूबर को आवास एवं विकास परिषद ने 661/6 पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।

फिर डाली गई अवमानना याचिका

आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की तरफ से फिर अवमानना याचिका दाखिल की गई। 27 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई लेकिन सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि संपूर्ण अवैध निमार्णों को ध्वस्त ना करना न्यायालय के पूर्व में जारी आदेशों की अवमानना है।

छह सप्ताह में दाखिल करेंगे रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2024 के आदेश पर अभी तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी रिपोर्ट तलब कर ली है। इसके लिए आवास एवं विकास परिषद को छह सप्ताह का समय दिया गया है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद मेरठ जोन के उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। छह सप्ताह के भीतर यह विभाग को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

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