Homeशहर और राज्यउत्तर प्रदेशएएसपी अनुज चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत

एएसपी अनुज चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत

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– एफआईआर पर रोक: हाईकोर्ट का आदेश, संभल हिंसा मामले में लोअर कोर्ट ने दिया था आदेश।

प्रयागराज। संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसपी अनुज चौधरी को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को संभल के सीजेएम के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। अब मामले की अगली सुनवाई पांच हफ्ते बाद होगी।

 

 

संभल निवासी यामीन की याचिका पर 9 जनवरी को सीजेएम ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी ने 29 जनवरी को हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती दी थी।

इसके बाद यूपी सरकार ने अनुज चौधरी की ओर से याचिका दायर की। सोमवार को इस याचिका पर पहली बार करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई। मंगलवार को जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीजेएम के आदेश पर रोक लगा दी।

जानिए क्यों पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के आदेश हुए थे-

संभल के नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन ने 6 फरवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यामीन ने आरोप लगाया कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने के लिए घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने उसे गोली मार दी।

यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था। मामले की सुनवाई 9 जनवरी 2026 को हुई थी, जिसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने सभी आरोपित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।

आदेश देने वाले जज का हो चुका है तबादला-

20 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया था। हालांकि, उनके साथ 13 अन्य जजों का भी तबादला हुआ था। उनकी जगह चंदौसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह को संभल का नया सीजेएम बनाया गया।

मगर 48 घंटे बाद ही उन्हें वापस चंदौसी भेज दिया गया। इसके बाद कौशांबी के सीजेएम दीपक कुमार जायसवाल को संभल का नया मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया।

24 नवंबर, 2024 को सर्वे के दौरान हिंसा में 4 की हुई थी मौत-

संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया था ये पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर ने 1529 में तुड़वाकर मस्जिद बनवा दिया। इसे लेकर 19 नवंबर, 2024 को संभल कोर्ट में याचिका दायर हुई। उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। उसी दिन शाम 4 बजे सर्वे के लिए टीम मस्जिद पहुंच गई। 2 घंटे सर्वे किया। हालांकि, उस दिन सर्वे पूरा नहीं हुआ। इसके बाद 24 नवंबर को सर्वे की टीम जामा मस्जिद पहुंची। मस्जिद के अंदर सर्वे हो रहा था।

इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग जुट गए। भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थर फेंके। इसके बाद हिंसा भड़क गई। इसमें गोली लगने से 4 लोगों की मौत हो गई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।

हिंसा के बाद पुलिस ने 3 महिलाओं सहित 79 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई।

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों के खिलाफ नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 18 जून को एसआईटी ने 1128 पन्नों में सांसद बर्क सहित 23 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है।

 

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