– प्राचीन द्रौपदी घाट मंदिर पर हो रहा है वार्षिक धार्मिक मेले का आयोजन।
शारदा रिपोर्टर हस्तिनापुर। सत्ता फेरी मेले के दौरान द्रौपदी घाट पर आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। पौराणिक नगरी हस्तिनापुर में हर वर्ष लगने वाला यह मेला श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। सुबह से ही दूर-दूर से आए हजारों भक्त गंगा तट पर एकत्रित होने लगे और पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की।

मेले के दौरान श्रद्धालुओं ने सरोवर में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्रौपदी घाट का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, जिससे इस स्थान की महत्ता और बढ़ जाती है। साधु-संतों के प्रवचन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प्रशासन ने मेले को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए। सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधों के साथ-साथ मेडिकल कैंप, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था भी की गई थी। पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती से भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिली।
मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों पर ग्रामीण संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। स्थानीय हस्तशिल्प, खिलौने और पारंपरिक व्यंजनों ने लोगों को आकर्षित किया। बच्चों और युवाओं में मेले को लेकर खास उत्साह नजर आया। सत्ता फेरी मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का भी प्रतीक बन गया है। द्रौपदी घाट पर उमड़ी यह आस्था की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज में परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का आज भी गहरा प्रभाव है।
हजारों वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष: मंदिर परिसर में स्थित हजारों वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। लोग इस वृक्ष की पूजा कर मनोकामनाएं मांगते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी इस स्थान के महत्व का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी पौराणिकता और अधिक प्रबल होती है।

