श्रमिकों को भड़काने, घटनाक्रम से जुड़े लोगों के संपर्क में रहने का आरोप
नोएडा। सेक्टर-84 स्थित मदरसन फैक्ट्री के पास 13 अप्रैल को हुई श्रमिक हिंसा के मामले में अदालत ने इंटरनेट मीडिया और चैट के जरिए आरोपितों की भूमिका सामने आने को गंभीरता से लिया है।
सत्र अदालत ने प्रियंवदा शर्मा, प्रेरित लोधा और शिवानी कौल की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। तीनों पर हिंसा से जुड़े फोटो-वीडियो हासिल कर श्रमिकों को भड़काने और घटनाक्रम से जुड़े लोगों के संपर्क में रहने का आरोप है।
अभियोजन के अनुसार, वेतन बढ़ोतरी समेत अन्य मांगों को लेकर श्रमिक मदरसन फैक्ट्री के पास एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम होने पर पुलिस ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया, लेकिन हालात बिगड़ गए।
सुबह करीब साढ़े आठ बजे से रात साढ़े नौ बजे तक उपद्रव हुआ। इस दौरान पुलिस पर लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला करने, सरकारी व निजी वाहनों में आग लगाने और पुलिस के वायरलेस सेट, सीयूजी फोन समेत अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
आरोप है कि उपद्रवियों ने कई फैक्ट्रियों के गेट और शीशे तोड़े। सीसीटीवी कैमरों को भी नुकसान पहुंचाया गया,जिससे घटना से जुड़े साक्ष्य प्रभावित हुए। जांच के दौरान सह आरोपितों के वाट्सऐप चैट और आडियो-वीडियो खंगाले गए। अभियोजन का दावा है कि इनमें तीनों आरोपितों की भूमिका सामने आई। शिवानी कौल के टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े होने का भी उल्लेख किया गया।
जमानत याचिका खारिज
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि तीनों घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे। इंटरनेट मीडिया पर पुलिस के रवैये से संबंधित जानकारी साझा करने को आधार बनाकर उन्हें मामले में फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने तीनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।